नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट से कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से तीन दिन पहले ही प्रश्नपत्र के कुछ सवाल लीक हो गए थे, जिन्हें WhatsApp, Telegram और ऑफलाइन क्लासों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया।
CBI के अनुसार इस पूरे मामले में कुछ विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और अन्य लोग शामिल थे। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 महत्वपूर्ण सबूत पेश किए हैं।
केमिस्ट्री विशेषज्ञ पर सवाल लीक करने का आरोप
CBI के मुताबिक केमिस्ट्री विषय विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में विशेष कक्षाएं आयोजित कीं। आरोप है कि इन कक्षाओं में छात्रों को वही सवाल और जवाब लिखवाए गए, जो बाद में NEET परीक्षा में पूछे गए।
जांच में छात्रों की नोटबुक, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। CBI का कहना है कि कुलकर्णी के मोबाइल से प्रश्नों की तस्वीरें और छात्रों व अभिभावकों से बातचीत के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
फिजिक्स के सवाल 25 हजार रुपये में लीक करने का आरोप
CBI ने चार्जशीट में दावा किया है कि फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार ने कथित तौर पर 25 हजार रुपये लेकर सवाल उपलब्ध कराए। जांच के अनुसार परीक्षा से करीब आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे हुए सवाल मौजूद थे।
आरोप है कि इन सवालों को आगे छात्रों तक पहुंचाने के लिए नेटवर्क बनाया गया था। कुछ बिचौलियों द्वारा छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच संपर्क कराया गया और लाखों रुपये की वसूली की गई।
राजस्थान में 40 से 50 छात्रों तक पहुंचा पेपर
CBI के अनुसार राजस्थान के सीकर में एक कोचिंग नेटवर्क के जरिए भी कथित रूप से लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि परीक्षा से पहले PDF फाइल को 40 से 50 छात्रों के बीच साझा किया गया।
जांच में कई WhatsApp ग्रुप सामने आए हैं, जिनके जरिए सवाल और अन्य जानकारियां साझा किए जाने का दावा किया गया है। आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर कोड नामों का इस्तेमाल भी किया।
अक्टूबर 2025 से शुरू हुई थी तैयारी
CBI की चार्जशीट के अनुसार पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले शुरू हो गई थी। आरोप है कि अक्टूबर 2025 से ही छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर पैसे लिए जाने लगे थे। कई मामलों में नकद और ऑनलाइन माध्यम से भुगतान किया गया।
प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जांच एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। CBI के अनुसार विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान कई मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था और सुरक्षा व्यवस्था में कुछ कमियां थीं, जिनका फायदा उठाकर प्रश्न बाहर पहुंचाए गए।
CBI ने दावा किया है कि लीक हुए सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मिलान हुआ। बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवालों में उच्च स्तर की समानता मिलने की बात कही गई है।
ईमेल से शुरू हुई थी जांच
CBI के अनुसार परीक्षा के बाद सीकर के एक शिक्षक ने लीक PDF और असली प्रश्नपत्र का मिलान किया। सवालों के मेल खाने के बाद उन्होंने NTA को ईमेल भेजा, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
फिलहाल मामले में अदालत में सुनवाई जारी है। आगे की कार्रवाई में अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।




