रायगढ़ में अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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खैर-तेंदू की अवैध कटाई कर दूसरे राज्यों में भेजी जा रही थी लकड़ी, फर्जी ट्रांजिट परमिट की आड़ में चलता था कारोबार

रायगढ़, 4 सितंबर। रायगढ़ पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वन क्षेत्र से कीमती खैर और तेंदू लकड़ियों की अवैध कटाई, भंडारण और अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है, जबकि वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम फरार बताया गया है।

पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया।

कई राज्यों तक फैला था अवैध कारोबार

जांच में सामने आया है कि तस्करी का यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ सहित ओडिशा और मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से लकड़ियों की कटाई कराकर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, लकड़ियों को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में अधिक कीमत पर खपाया जाता था।

आरोप है कि ग्रामीणों को आर्थिक लालच देकर वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू के पेड़ों की कटाई कराई जाती थी। इसके बाद लकड़ी को रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित गोदाम में जमा किया जाता था।

गढ़उमरिया के गोदाम में मिली थी बड़ी मात्रा में लकड़ी

वन विभाग को पिछले वर्ष सूचना मिली थी कि जूटमिल थाना क्षेत्र के जामटीकरा-गढ़उमरिया में एक गोदाम किराये पर लेकर वहां वन क्षेत्रों से काटी गई लकड़ियों का अवैध भंडारण किया जा रहा है।

5 मई 2025 को वन विभाग की टीम ने गोदाम में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान एक ट्रक में लदे तेंदू के 42 लट्ठे, जिनकी मात्रा 1.731 घन मीटर थी, बरामद किए गए। इसके अलावा गोदाम से तेंदू और खैर प्रजाति के 146 लट्ठे, कुल 6.741 घन मीटर, नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी और कटर मशीन भी जब्त की गई थी।

मौके से वजन मशीन, कुल्हाड़ी और हथौड़ा भी बरामद किया गया था।

फर्जी परमिट ने खोला तस्करी के नेटवर्क का राज

कार्रवाई के दौरान आरोपियों की ओर से लकड़ियों के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट प्रस्तुत किया गया था। वन विभाग की जांच में इस दस्तावेज पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। इसके बाद परमिट के फर्जी होने की आशंका गहराई और मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच आगे बढ़ने पर वन विभाग को मामला केवल अवैध लकड़ी भंडारण तक सीमित नहीं लगा, बल्कि इसके पीछे संगठित तरीके से संचालित तस्करी नेटवर्क होने के संकेत मिले।

पुलिस ने गठित की विशेष टीम

वन विभाग की ओर से 2 सितंबर 2026 को जूटमिल थाने में आवेदन दिया गया। इसके आधार पर अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में BNS की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) और 111 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की।

गोदाम से दूसरे राज्यों तक पहुंचाई जाती थी लकड़ी

पुलिस की जांच के मुताबिक रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया में गोदाम किराये पर लिया था। यहां वन क्षेत्रों से कटवाकर लाई गई लकड़ियों को जमा किया जाता था। इसके बाद लकड़ी की छिलाई और अन्य प्रक्रिया कर उसे परिवहन के जरिए दूसरे राज्यों में भेजने की व्यवस्था की जाती थी।

पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में मनीष अग्रवाल की भूमिका बिजनेस पार्टनर के रूप में सामने आई, जबकि परिवहन से जुड़े कार्य में सलाउद्दीन खान और भरत कुमार मेश्राम की भूमिका की जांच की गई।

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश जारी

विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को हिरासत में लिया। पूछताछ और विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है।

वहीं, मामले में नाम सामने आए भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अवैध लकड़ी की सप्लाई एवं परिवहन से संबंधित कड़ियों की भी जांच कर रही है।

वन विभाग की कार्रवाई में जब्त सामग्री

गढ़उमरिया स्थित गोदाम में की गई कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने बड़ी मात्रा में लकड़ी और उपकरण जब्त किए थे। इनमें ट्रक में लदे 42 तेंदू लट्ठे, 146 नग तेंदू एवं खैर के लट्ठे, नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी, कटर मशीन, वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा शामिल हैं।

पुलिस-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से खुला नेटवर्क

पूरे मामले में पुलिस और वन विभाग के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम, एसडीओ तन्मय कौशिक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में की गई।

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