SECL कोल ब्लॉक के विरोध में किसानों का आक्रोश चरम पर, 11 सितंबर को धरमजयगढ़ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन

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धरमजयगढ़ कॉलोनी की बैठक में आंदोलन को तेज करने का फैसला, सर्वे कार्य के विरोध का भी ऐलान

धरमजयगढ़। दुर्गापुर-शाहपुर प्रस्तावित SECL कोल ब्लॉक को लेकर धरमजयगढ़ क्षेत्र के किसानों और प्रभावित ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रस्तावित कोयला परियोजना के दायरे में आने वाली जमीन, जंगल और कृषि आधारित आजीविका को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ी हुई है। किसानों ने अब आंदोलन को गांवों से आगे ले जाकर शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज मजबूती से पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।

1,677 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है कोल ब्लॉक

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016 में केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय की ओर से दुर्गापुर-शाहपुर क्षेत्र में करीब 1,677 हेक्टेयर क्षेत्र में कोल ब्लॉक प्रस्तावित किया गया था। किसानों का कहना है कि परियोजना के आगे बढ़ने से खेती की जमीन प्रभावित होगी और इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

त्रिपक्षीय बैठक के बाद भी नहीं बनी सहमति

SECL कोल ब्लॉक के विरोध को लेकर जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित पक्षों और प्रभावित ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय बैठक भी हो चुकी है। किसानों का कहना है कि बैठक के बावजूद उनकी मुख्य चिंताओं का कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन को और संगठित करने का निर्णय लिया है।

दुर्गापुर बस्ती से शुरू हुई आंदोलन की नई कड़ी

26 अगस्त को ग्राम पंचायत दुर्गापुर बस्ती में किसानों की बड़ी बैठक आयोजित की गई थी। इस दौरान आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर ग्रामीणों ने अपनी जमीन और क्षेत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया था। बैठक में किसानों ने परियोजना के विरोध को लेकर एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया।

धरमजयगढ़ कॉलोनी में जुटे किसान, सर्वे का विरोध

इसी क्रम में 3 सितंबर को धरमजयगढ़ कॉलोनी में किसानों और प्रभावित ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने SECL की प्रस्तावित गतिविधियों का विरोध करने की बात कही। विशेष रूप से कोल ब्लॉक से संबंधित सर्वे कार्य को लेकर भी किसानों ने विरोध जताते हुए इसे स्वीकार नहीं करने का रुख सामने रखा।

किसानों ने कहा—खेती बची तो ही बचेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

बैठक में किसान दिलीप मिश्रा ने कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अनेक परिवार लंबे समय से खेती पर निर्भर हैं। यहां तरबूज और मक्का जैसी फसलों का उत्पादन होता है, जिनकी अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति की जाती है।

उनका कहना था कि यदि बड़ी मात्रा में कृषि भूमि खनन परियोजना की चपेट में आती है तो खेती का क्षेत्र घटेगा और इससे किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

जमीन के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की भी चिंता

किसानों ने कहा कि उनका विरोध केवल जमीन के अधिग्रहण तक सीमित नहीं है। उनके लिए कृषि भूमि के साथ जंगल, पर्यावरण, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी मांगों को न्यायालय से लेकर मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन के स्तर तक उठाएंगे।

11 सितंबर को क्लब ग्राउंड में होगी बड़ी सभा

बैठक में आगामी 11 सितंबर को धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड में विशाल रैली और आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। किसानों का लक्ष्य इस आयोजन के माध्यम से प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध में अपनी एकजुटता प्रदर्शित करना और प्रशासन तक अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

आंदोलन के लिए किसानों ने खुद जुटाया सहयोग

बैठक में आंदोलन के संभावित खर्च को लेकर भी चर्चा हुई। किसानों के बीच सहयोग राशि जुटाने के लिए एक डिब्बा रखा गया, जिसमें लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग दिया। इस दौरान ग्रामीणों की एकजुटता और आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई दी।

गांव-गांव बैठकों से आंदोलन को विस्तार देने की तैयारी

किसानों ने प्रभावित गांवों में लगातार बैठकें आयोजित करने और अधिक से अधिक ग्रामीणों को आंदोलन से जोड़ने की रणनीति बनाई है। इससे स्पष्ट है कि कोल ब्लॉक का विरोध अब एक बैठक तक सीमित नहीं रहकर चरणबद्ध आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

11 सितंबर की रैली पर टिकी सभी की नजर

प्रस्तावित कोल ब्लॉक के खिलाफ लगातार सामने आ रहे विरोध के बीच अब सभी की नजर 11 सितंबर को होने वाली रैली और आमसभा पर है। किसानों के अनुसार इस आयोजन में बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है। क्लब ग्राउंड से उठने वाली किसानों की आवाज प्रशासन और शासन तक कितनी मजबूती से पहुंचती है, यह 11 सितंबर के आयोजन के बाद स्पष्ट होगा।

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