अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू और राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन का आयोजन, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू) और राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को हनुमानगढ़ की अग्रसेन धर्मशाला में जिला स्तरीय विशाल संयुक्त कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और ग्रामीण कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीटू प्रदेश अध्यक्ष कामरेड भंवर सिंह शेखावत ने किया, जबकि समापन किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कामरेड पेमाराम ने किया। इस दौरान किसान-मजदूर हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का आह्वान
किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कॉ. पेमाराम ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि पहले तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने लंबा संघर्ष किया, जिसके बाद सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब बीज विधेयक और ट्रेड बिल जैसे कदम किसानों के लिए नुकसानदायक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार न तो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कर रही है और न ही किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि किसान अब आत्महत्या नहीं करेगा, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेगा। इस दौरान 10 अगस्त को देशभर में किसान-मजदूर जेल भरो आंदोलन करने की घोषणा की गई।
मनरेगा को कमजोर करने का लगाया आरोप
राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कॉ. दुर्गा स्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर लगातार हमला कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा की जगह नए रोजगार कानून लाकर इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, लेकिन सरकार की नीतियों से मजदूरों के सामने रोजगार का संकट बढ़ रहा है। उन्होंने आमजन से मजदूर हितों की रक्षा के लिए आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
चार लेबर कोड को लेकर जताया विरोध
सीटू प्रदेश अध्यक्ष कॉ. भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों को अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने और संघर्ष करने के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा व वेतन संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने मजदूरों से संगठित होकर संघर्ष करने की अपील की।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
कन्वेंशन के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जब तक किसान और मजदूर विरोधी नीतियां वापस नहीं ली जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कार्यक्रम में शेर सिंह शाक्य, रोहिताश सोलंकी, बसंत सिंह, जगजीत सिंह जग्गी, मनीराम मेघवाल, पहलाद बहलोल नगर, सुरेश स्वामी, गोपाल, गुरदेव सिंह, बग्गा सिंह, श्याम लाल, बिंटू राम सिंह, अमरजीत, विनोद मावर, वेद मक्कासर, सुरेश जोडकिया, जगदीश यादव, सोपत राम, संदीप, बरुण बिश्नोई, सुरेंद्र शर्मा, बलराम स्वामी, मेवाराम, कृपाराम, अमरजीत, रामचंद्र, महिला समिति अध्यक्ष सरबजीत कौर, रिछपाल सिंह राठौड़, गुरु प्रेम सिंह, सुल्तान खान और नौजवान सभा जिला अध्यक्ष देवीलाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


