अभिषेक कुमार पाण्डेय
संवाददाता, छत्तीसगढ़
कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग को लेकर भूविस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों का असंतोष एक बार फिर सामने आया है। KNR कंपनी और सोनू-मोनू कंपनी में स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता से रोजगार देने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को लिखित सूचना दी गई है।
बैठक के बाद भी नहीं हुआ समाधान
आंदोलनकारियों के अनुसार यमदासी/यमदासी पाली, पड़निया, जटराज, सोनपुरी, खैरभावना, कनबेरी, गेवर्रा, रिस्दी और बड़ौरा समेत प्रभावित गांवों के भूविस्थापितों ने रोजगार की मांग को लेकर 15 जुलाई 2026 को धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद 27 जुलाई को कुसमुंडा महाप्रबंधक के साथ बेरोजगार ग्रामीणों की बैठक हुई थी।
एक सप्ताह में बैठक का मिला था आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि बैठक में आश्वासन दिया गया था कि एक सप्ताह के भीतर KNR कंपनी और सोनू-मोनू कंपनी के एचओडी के साथ बैठक कर रोजगार से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। हालांकि, उनके अनुसार निर्धारित समय बीतने के बाद भी बैठक नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने कुसमुंडा क्षेत्र के एपीएम से संपर्क करने का भी दावा किया है, लेकिन उन्हें ठोस समाधान नहीं मिला।
बाहरी लोगों की भर्ती का आरोप
स्थानीय बेरोजगारों ने आरोप लगाया है कि एक ओर प्रभावित गांवों के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं संबंधित कंपनियों में बाहरी लोगों की भर्ती की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर भूविस्थापितों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
3 और 7 सितंबर को कामबंद आंदोलन का ऐलान
लिखित सूचना के अनुसार मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में भूविस्थापितों ने दो चरणों में कामबंद आंदोलन और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
- 3 सितंबर 2026, सुबह 8 बजे: KNR कंपनी में कामबंद आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन।
- 7 सितंबर 2026, सुबह 8 बजे: सोनू-मोनू कंपनी में कामबंद आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन।
स्थानीय रोजगार का मुद्दा फिर गरमाया
कुसमुंडा क्षेत्र की खनन परियोजनाओं से प्रभावित गांवों के लोगों के लिए रोजगार का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग और कथित बाहरी भर्ती को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर विवाद को हवा दे दी है।
भूविस्थापितों ने एसईसीएल प्रबंधन, संबंधित कंपनियों और प्रशासन से समय रहते समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो निर्धारित तिथियों पर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन और प्रशासन की होगी।





