15वें वित्त आयोग की राशि में अनियमितता का आरोप, जांच से पहले दस्तावेजों में सुधार करने का दावा
कोरबा/पाली। ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत की सरपंच प्रमिला कोराम और तत्कालीन सचिव पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2025-26 में पंचायत को प्राप्त राशि के उपयोग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। उनका दावा है कि कई विकास कार्य या तो धरातल पर दिखाई नहीं देते या स्वीकृत राशि की तुलना में कम स्तर पर कराए गए हैं।
जांच प्रक्रिया पर भी ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत उप संचालक द्वारा जांच के निर्देश जारी किए जाने के बाद निर्धारित समयावधि में जांच पूरी नहीं हुई। आरोप लगाया गया है कि इस दौरान दस्तावेजों में संशोधन कर कार्य आदेश, माप पुस्तिका, मस्टर रोल और अन्य रिकॉर्ड तैयार किए गए।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में निर्माण कार्य और प्रस्तुत बिलों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भौतिक सत्यापन की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल दस्तावेजी जांच के बजाय कार्यों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए। उनका कहना है कि इससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
पंचायत कार्यों में हस्तक्षेप का भी आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत संचालन में सरपंच के परिजनों और पूर्व सचिव के परिवार के हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इस संबंध में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महत्वपूर्ण: यह समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।


