बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब से जुड़े विवाद में कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला चर्चा में है। वहीं पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराने और मामले में लागू कानूनी धाराओं की समीक्षा की मांग की है।
व्हाट्सऐप ग्रुप में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला
पूर्व अध्यक्ष की शिकायत के अनुसार, प्रेस क्लब के अधिकृत व्हाट्सऐप ग्रुप में कैलाश यादव द्वारा उनके खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणियां की गईं। शिकायत के साथ चैट स्क्रीनशॉट सहित डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंपे जाने का दावा किया गया है।
आईटी एक्ट की धाराएं लगाने की मांग
इरशाद अली का आरोप है कि डिजिटल माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने के बावजूद पुलिस ने आईटी कानून के तहत धाराएं नहीं लगाईं। उन्होंने उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर मामले में उचित कानूनी प्रावधान लागू करने की मांग की है।
काउंटर शिकायत के बाद पूर्व अध्यक्ष पर भी FIR
वहीं कैलाश यादव की ओर से 15 अगस्त को कथित धमकी को लेकर शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। इरशाद अली पक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
पुलिस की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
पूर्व अध्यक्ष का आरोप है कि एक मामले में डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया अलग रही, जबकि दूसरी शिकायत पर तेजी से एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोनों पक्षों के आरोपों की समान प्रक्रिया के तहत जांच करने की मांग की है।
पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी
मामले में लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष की ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं। सिविल लाइन पुलिस की ओर से जांच की स्थिति, एफआईआर में दर्ज धाराओं और दोनों शिकायतों पर आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।




