Bilaspur News : डॉक्टर बनने का सपना लेकर निकले अमर अग्रवाल, पिता के संस्कारों ने बनाया सियासत का माहिर खिलाड़ी

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बिलासपुर। कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल ने बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। छात्र जीवन से लेकर करीब 15 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री रहने के सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और जो काम नहीं आता, उसे सीखने में झिझक नहीं होनी चाहिए।

पिता से मिली राजनीति की पहली सीख

अमर अग्रवाल ने अपनी राजनीतिक सोच और संस्कारों का श्रेय अपने पिता स्व. लखीराम अग्रवाल को दिया। उन्होंने बताया कि उनके घर पर सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे और राजमाता सिंधिया जैसे वरिष्ठ नेताओं का आना-जाना था। पिता की सादगी और काम करने के तरीके को करीब से देखते हुए उन्हें राजनीति की बारीकियां समझने का अवसर मिला।

बिलासपुर से शुरू हुआ सियासी सफर

22 सितंबर 1963 को खरसिया में जन्मे अमर अग्रवाल ने बिलासपुर में बायोलॉजी की पढ़ाई की। इसके बाद रायपुर के साइंस कॉलेज और दुर्ग में शिक्षा हासिल करने के बाद बिलासपुर के सीएमडी कॉलेज से बीकॉम किया। छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीतिक जीवन में कदम रखने के बाद वर्ष 1996 में वे भाजयुमो के जिलाध्यक्ष बने और वर्ष 1998 में पहली बार विधायक चुने गए।

नार्वे के मॉडल से शुरू हुई 108 और 102 सेवा

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझने के लिए उन्होंने विदेशों का अध्ययन किया। नार्वे के मॉडल से उन्हें यह सीख मिली कि स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करना भी बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत छत्तीसगढ़ में संजीवनी 108 और महतारी 102 एंबुलेंस सेवाओं की शुरुआत की गई।

पहली फाइल से 100 फाइलों तक का सफर

प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में सरकारी फाइलों की प्रक्रिया समझने में उन्हें कठिनाई हुई। सीखने और लगातार अध्ययन के बाद उनकी कार्यक्षमता में काफी सुधार आया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब वे एक घंटे में करीब 100 फाइलों का निपटारा करने लगे।

अरपा नदी के मुद्दे पर बेबाक राय

बिलासपुर के विकास और अरपा नदी को लेकर भी अमर अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अरपा नदी के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ हुई है। शिवघाट और पचरीघाट जैसे प्रोजेक्ट बनने के बावजूद पानी रोकने की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई थी।

अगले 30 वर्षों को ध्यान में रखकर मास्टरप्लान

शहर के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि बिलासपुर की आगामी तीन दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मास्टरप्लान तैयार किया गया है। इसके कार्यों का जमीनी असर आने वाले वर्षों में दिखाई देने की उम्मीद है।

भजिया-चटनी से लेकर थाई फूड तक पसंद

कार्यक्रम के दौरान अमर अग्रवाल ने अपने खानपान से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह शाकाहारी हैं। बिलासपुर की स्थानीय भजिया-चटनी उन्हें पसंद है, वहीं जापानी, इटालियन और थाई वेज फूड भी वे पसंद करते हैं।

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