बिलासपुर। बिना चिकित्सकीय पर्चे के स्टेरॉयड और हैवी एंटीबायोटिक्स की बिक्री पर रोक लगाने के लिए ड्रग विभाग ने बुधवार को शहर के प्रमुख मेडिकल स्टोरों और थोक दवा एजेंसियों में विशेष जांच अभियान चलाया। औषधि निरीक्षकों की अलग-अलग टीमों ने 16 हाई-रिस्क दवाओं की बिक्री, स्टॉक और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की गहन जांच की।
स्टॉक और रिकॉर्ड का किया गया मिलान
जांच के दौरान मेडिकल स्टोरों में उपलब्ध दवाओं के भौतिक स्टॉक का रिकॉर्ड से मिलान किया गया। साथ ही यह भी देखा गया कि दवाएं अधिकृत एवं लाइसेंसी सप्लायर से खरीदी गई हैं या नहीं तथा शेड्यूल H और H1 के तहत आने वाली दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के तो नहीं बेची जा रही हैं।
अभियान के दौरान हिन्द फार्मा और मिक मेडिकेयर से तीन दवाओं के नमूने जांच के लिए भी लिए गए।
इन मेडिकल स्टोर्स में हुई कार्रवाई
- चांटीडीह: साईं मेडिकल, तिरुपति बालाजी मेडिकल
- तारबाहर: विमल इंटरप्राइजेज, मेड राइज एजेंसी, ज्योति फार्मास्युटिकल
- तेलीपारा: सलूजा मेडिकल, आशा एजेंसीज, सिटी केमिस्ट
इन 16 दवाओं पर रही विशेष निगरानी
जांच के दौरान निम्न दवाओं के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड की विशेष जांच की गई—
- डेका ड्यूराबोलिन
- केन्सकोर्ट
- डेफकोर्ट-6
- एजिनल-500
- ऑग्मेटिन-625
- क्लैवम-625
- एजिलाइड-500
- ओम्निसेफ-200
- न्यूरोकाइंड एलसी
- एसिलॉक आरडी
- टेलवास एएम बीएच
- वर्टिन-16
- पैन डी
- पैंटोप
- कैंडिड
- मोंटिना एल
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
सहायक औषधि नियंत्रक भीष्म सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य नकली एवं अमानक दवाओं की बिक्री, कालाबाजारी और बिना चिकित्सकीय पर्चे के प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उनका दवा बिक्री लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।




