छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों-पेंशनर्स को मोदी की गारंटी का लाभ नहीं मिलने का आरोप, DA 63% के मुकाबले राज्य में 58% पर अटका

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राजेश चटर्जी बोले– शासकीय सेवकों और पेंशनर्स से किए वादे पूरे करने में विफल रही राज्य सरकार, आलोक शुक्ला ने पूछा– क्या छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों पर महंगाई का असर नहीं पड़ता?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA) एवं महंगाई राहत (DR) को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2026 से महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का DA बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया है, जबकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनर्स को फिलहाल 58 प्रतिशत DA/DR मिल रहा है। इस अंतर को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।

फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने आरोप लगाया कि शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए मोदी की गारंटी को लागू करने में राज्य सरकार विफल रही है। वहीं प्रदेश संगठन सचिव आलोक शुक्ला ने सवाल उठाया कि जब महंगाई का प्रभाव केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों पर समान रूप से पड़ता है, तो महंगाई भत्ते में इतना अंतर क्यों है?

केंद्र में जुलाई 2026 से DA बढ़कर 63 प्रतिशत

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत में 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है। सातवें वेतन आयोग के तहत निर्धारित गणना पद्धति के आधार पर यह वृद्धि की गई है।

महंगाई भत्ते में संशोधन के लिए पिछले 12 महीनों के औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के औसत आंकड़ों को आधार बनाया जाता है। इसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करना और कर्मचारियों तथा पेंशनर्स की क्रय शक्ति बनाए रखना है।

फेडरेशन के अनुसार, इस वृद्धि से लगभग 48.54 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ DA/DR नवंबर 2026 से वेतन और पेंशन के साथ दिए जाने की जानकारी दी गई है। चूंकि वृद्धि 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील है, इसलिए जुलाई से अक्टूबर तक का एरियर भी देय होगा।

AICPI के आंकड़ों के आधार पर हुई वृद्धि

राजेश चटर्जी और आलोक शुक्ला ने जुलाई 2025 से जून 2026 तक के औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इसी अवधि के औसत के आधार पर महंगाई भत्ते में वृद्धि की गणना की गई है।

उनके अनुसार, संबंधित 12 महीनों के सूचकांक के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • जुलाई 2025 – 146.5
  • अगस्त 2025 – 147.1
  • सितंबर 2025 – 147.3
  • अक्टूबर 2025 – 147.7
  • नवंबर 2025 – 148.2
  • दिसंबर 2025 – 148.2
  • जनवरी 2026 – 148.6
  • फरवरी 2026 – 148.5
  • मार्च 2026 – 149.1
  • अप्रैल 2026 – 149.9
  • मई 2026 – 150.8
  • जून 2026 – 151.9

फेडरेशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, इन आंकड़ों का औसत 148.65 है। इसी आधार पर जुलाई 2026 से महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया।

छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत DA/DR पर ही मिल रहा लाभ

फेडरेशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी 2026 से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत मिल रही है। जबकि केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से इसे 60 प्रतिशत और जुलाई 2026 से बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर दिया है।

पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार ने जुलाई 2025 से देय 58 प्रतिशत DA/DR को जनवरी 2026 से स्वीकृति दी थी। इस तरह जुलाई 2025 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि में राज्य के कर्मचारी और पेंशनर्स 58 प्रतिशत की दर से ही महंगाई भत्ता एवं राहत प्राप्त कर रहे हैं।

उनका सवाल है कि जब केंद्र सरकार जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत और जुलाई 2026 से 63 प्रतिशत DA/DR स्वीकृत कर चुकी है, तो छत्तीसगढ़ सरकार ने अब तक इसी अनुरूप निर्णय क्यों नहीं लिया है?

मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से देय तिथि से DA/DR देने की मांग

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी से केंद्र के समान महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत स्वीकृत करने की मांग की है।

फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि महंगाई का असर केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों पर समान रूप से पड़ता है। ऐसे में DA/DR के मामले में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स के साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र के समान दर से देय तिथि के आधार पर महंगाई भत्ता और राहत देने की मांग दोहराई है।

चुनावी वादे और कर्मचारियों के अधिकार पर भी उठाए सवाल

फेडरेशन ने इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव 2023 से पहले किए गए वादों से भी जोड़ते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी के पुराने वीडियो संदेश का उल्लेख किया है। पदाधिकारियों के मुताबिक, उस वीडियो संदेश में महंगाई भत्ते को कर्मचारियों का मौलिक अधिकार बताया गया था।

राजेश चटर्जी और आलोक शुक्ला ने राज्य सरकार से कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के हित में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के DA/DR के बीच बढ़ते अंतर ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में महंगाई भत्ते का मुद्दा गरमा दिया है। अब कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें मुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री के निर्णय पर टिकी हैं कि राज्य सरकार केंद्र के समान महंगाई भत्ता कब और किस देय तिथि से स्वीकृत करती है।

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