रायगढ़। रायगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सावित्री नगर (मोदीपारा) निवासी संवरा जनजाति की एकल विधवा महिला जानकी सिदार और उनके कॉलेज में पढ़ने वाले पुत्र सत्यजीत सिदार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार ने आरक्षक को बचाने के लिए कथित तौर पर झूठे बयान तैयार करने, शिकायत को दबाने और मामले को रफा-दफा करने के एवज में 30 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। मामला न्यायालय तक पहुंचने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय, रायगढ़ ने धारा 175(3) BNSS के तहत पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
आधी रात घर पहुंचकर दुर्व्यवहार करने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ित परिवार ने बताया कि कथित घटना 4 जून 2026 की मध्यरात्रि लगभग 12:30 बजे की है। आरोप है कि सिटी कोतवाली रायगढ़ में पदस्थ आरक्षक एडवर्ड कुजूर (बैज नंबर 121) शराब के नशे में बिना किसी महिला पुलिसकर्मी के कुछ स्थानीय लोगों के साथ जानकी सिदार के घर पहुंचा था।
परिवार का आरोप है कि दरवाजा पीटने के बाद आरक्षक और उसके साथ आए लोगों ने जानकी सिदार तथा उनके कॉलेज में अध्ययनरत बेटे के साथ सार्वजनिक रूप से जातिसूचक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
पीड़ित परिवार का दावा है कि घर में लगे CCTV कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। परिवार ने इन फुटेज को मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, फर्जी बयान तैयार करने का आरोप
पीड़ित परिवार के अनुसार, 6 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने आरोप लगाया कि संबंधित आरक्षक को विभागीय कार्रवाई से बचाने के लिए अजाक और कोतवाली पुलिस द्वारा मोहल्ले की चार महिलाओं के नाम पर कथित रूप से मनगढ़ंत बयान तैयार किए गए।
परिवार का कहना है कि सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों से इन बयानों की प्रक्रिया को लेकर सवाल सामने आए हैं। पीड़ित पक्ष ने इसे जांच को प्रभावित करने का प्रयास बताया है।
इसके अलावा, परिवार ने आरोप लगाया कि दबाव बनाने के उद्देश्य से छात्र सत्यजीत सिदार के खिलाफ छेड़छाड़ और शादी के लिए दबाव बनाने से संबंधित शिकायत की गई थी।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, न्यायालय में प्रस्तुत केस डायरी में पुलिस ने स्पष्ट किया कि छात्र के विरुद्ध कोई अपराध पंजीबद्ध नहीं है और शिकायत असत्य पाई गई। इस संबंध में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों को परिवार ने अपने पक्ष का महत्वपूर्ण आधार बताया है।
मामले को रफा-दफा करने 30 हजार रुपये मांगने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ित परिवार ने पुलिस विभाग की एक महिला कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का भी गंभीर आरोप लगाया। परिवार के अनुसार, कोतवाली थाने में पदस्थ महिला पुलिसकर्मी राजश्री वैष्णव ने मामले को रफा-दफा करने के एवज में 30 हजार रुपये की मांग की थी।
आरोप है कि उक्त रकम थाना प्रभारी और संबंधित महिला पुलिसकर्मी के बीच बांटे जाने की बात कही गई थी। परिवार का दावा है कि इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र के साथ इस डिजिटल साक्ष्य को न्यायालय में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, ऑडियो रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और उसमें दर्ज बातचीत की पुष्टि न्यायिक परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
CJM न्यायालय ने पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
मामले में न्यायालयीन हस्तक्षेप के बाद अब पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, रायगढ़ ने धारा 175(3) BNSS के तहत पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
इस घटनाक्रम को पीड़ित परिवार अपनी शिकायतों की न्यायिक स्तर पर सुनवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। अब पुलिस द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट से जांच की प्रगति और मामले में की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आरक्षक की बर्खास्तगी और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
पीड़ित जानकी सिदार और उनके पुत्र सत्यजीत सिदार ने प्रशासन तथा न्यायालय से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार ने आरोपी आरक्षक एडवर्ड कुजूर को तत्काल बर्खास्त करने, कथित रूप से फर्जी साक्ष्य तैयार करने वाले जांच अधिकारियों के विरुद्ध धारा 258 BNS के तहत आपराधिक कार्रवाई करने तथा रिश्वत मांगने के आरोपों में महिला पुलिसकर्मी राजश्री वैष्णव और संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
परिवार का कहना है कि वे न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
पुलिस की जांच और न्यायालयीन रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
एक ओर पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायालय द्वारा स्टेटस रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि, रिश्वत मांगने, फर्जी बयान तैयार करने और आरक्षक के कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पुलिस न्यायालय के समक्ष क्या रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। मामले में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध CCTV फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग का विधिसम्मत परीक्षण तथा सभी संबंधित पक्षों का जवाब ही वास्तविक स्थिति सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


