27 राजस्व निरीक्षक, 1,385 सर्वेयर और 900 से अधिक कोटवारों ने संभाली जिम्मेदारी, किसानों की मौजूदगी में खेतों की पहचान कर तैयार किए गए पॉलीगॉन
रायगढ़, 29 अक्टूबर। पटवारियों की हड़ताल के बीच रायगढ़ जिला प्रशासन ने धान के रकबे के भौतिक सत्यापन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। जिले में निर्धारित 1 लाख 52 हजार 49 धान खसरों में से 1 लाख 48 हजार 773 से अधिक का पॉलीगॉन जनरेशन पूरा कर लिया गया है। इस तरह करीब 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। शेष खसरों का सत्यापन भी जल्द पूरा करने के लिए राजस्व विभाग का मैदानी अमला जुटा हुआ है।
पटवारियों की अनुपस्थिति में किसानों के धान विक्रय की प्रक्रिया प्रभावित न हो और वास्तविक रकबे का सत्यापन समय पर पूरा किया जा सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाई। राजस्व निरीक्षकों, सर्वेयरों, कोटवारों और किसानों के सहयोग से खेतों तक पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया गया।
किसानों की मौजूदगी में खेतों की पहचान
धान के रकबे का सत्यापन केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि संबंधित खेतों तक पहुंचकर उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि की गई। थर्ड पार्टी सर्वेयरों को संबंधित खसरों की जानकारी देकर मौके पर भेजा गया। गांव के कोटवारों ने खेत और उसके मालिक की पहचान कराने में सहयोग किया।
इसके बाद किसानों से संपर्क कर उन्हें खेतों तक बुलाया गया। किसानों ने स्वयं अपने खेतों की सीमाएं बताईं, जिसके आधार पर सर्वेयरों ने मौके पर पॉलीगॉन तैयार किया और धान से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज की। इस प्रक्रिया में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी से खेतों की पहचान की पुष्टि करने में मदद मिली।
राजस्व नक्शों और गूगल मैप से मिलान
सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने के लिए राजस्व नक्शों का गूगल मैप से मिलान किया गया। इससे खसरों की भौगोलिक स्थिति समझने और संबंधित खेत तक पहुंचने में सहायता मिली। मौके पर किए गए सत्यापन, किसान की पुष्टि और कोटवारों की स्थानीय जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड में संभावित त्रुटियों को दूर करने का प्रयास किया गया।
यह प्रक्रिया डिजिटल क्रॉप सर्वे के दूसरे चरण के अंतर्गत की जा रही है। पहले चरण में डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से गिरदावरी की जाती है, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए संबंधित खसरों की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सर्वेयरों की मदद से पॉलीगॉन तैयार किए जा रहे हैं।
27 राजस्व निरीक्षक और 1,385 सर्वेयर मैदान में सक्रिय
इस अभियान में 27 राजस्व निरीक्षक और लगभग 1,385 सर्वेयर मैदानी स्तर पर सक्रिय रहे। इसके अलावा 900 से अधिक कोटवारों ने गांवों में खेतों और खसरों की पहचान कराने में सहयोग दिया।
तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य की प्रगति पर नजर रखी, जबकि अनुविभागीय अधिकारियों ने भी मैदानी कार्यों की समीक्षा की। जिला स्तर पर अपर कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर हेमेन्द्र भूआर्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की निगरानी की। शेष कार्यों की प्रतिदिन समीक्षा कर संबंधित क्षेत्रों में टीमों को सक्रिय किया गया।
पांच तहसीलों में पूरा हुआ शत-प्रतिशत काम
जिले की पांच तहसीलों में निर्धारित धान खसरों का पॉलीगॉन जनरेशन शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इनमें घरघोड़ा, धरमजयगढ़, पुसौर, मुकडेगा और रायगढ़ तहसील शामिल हैं।
तहसीलवार प्रगति इस प्रकार है:
- घरघोड़ा: 6,091 खसरों का कार्य पूरा।
- धरमजयगढ़: 15,458 खसरों का कार्य पूरा।
- पुसौर: 34,128 खसरों का कार्य पूरा।
- मुकडेगा: 1,577 खसरों का कार्य पूरा।
- रायगढ़: 28,800 खसरों का कार्य पूरा।
अन्य तहसीलों में भी सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ा है। खरसिया में 99.40 प्रतिशत, लैलूंगा में 98.76 प्रतिशत, तमनार में 98.67 प्रतिशत, छाल में 90.02 प्रतिशत और कापू में 84.97 प्रतिशत कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई है।
प्रशासन के अनुसार, जिले के 902 गांवों में सत्यापन कार्य किया गया है, जबकि इस व्यापक अभियान में कुल 938 गांव शामिल रहे हैं।
किसानों को धान बेचने में परेशानी न हो, प्रशासन का जोर
जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वास्तविक धान रकबे का सत्यापन समय पर पूरा करना और किसानों के धान विक्रय की प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाना है। पटवारियों की हड़ताल के बीच वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से काम आगे बढ़ाया गया, ताकि किसान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने धान का विक्रय कर सकें।
प्रशासन शेष खसरों का सत्यापन पूरा करने में जुटा है। इसके लिए मैदानी अमले की निगरानी और लंबित कार्यों की समीक्षा जारी है।
पटवारियों की हड़ताल के बीच धान रकबे के सत्यापन में 98 प्रतिशत प्रगति से प्रशासन को शेष कार्य जल्द पूरा करने की उम्मीद है। अब निगाहें लंबित खसरों के सत्यापन और आगामी धान खरीदी प्रक्रिया पर टिकी हैं, ताकि किसानों को रकबे से संबंधित कार्यों में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


