दशकों पुराने रास्ते को बंद करने का आरोप, पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर पड़ा असर
कोरबा/पसान। पेंड्रारोड से गेवरा-दीपका को जोड़ने वाले रेल कॉरिडोर के निर्माण के बीच ग्राम पंचायत बैरा (पसान) क्षेत्र में रास्ता बंद किए जाने को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय सरपंचों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब पांच वर्षों से जारी रेल परियोजना के निर्माण के दौरान दशकों पुराने सार्वजनिक मार्ग को बंद कर दिया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग केवल आवागमन का साधन नहीं था, बल्कि आसपास के क्षेत्र में स्थित उदरदा पर्यटन स्थल तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता था। रास्ता बंद होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर स्थानीय दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।
पर्यटन स्थल तक पहुंच बाधित, कारोबार प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि उदरदा क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, जलराशि और वन क्षेत्र के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पर रास्ता बंद होने का असर पड़ा है। स्थानीय व्यवसायियों के मुताबिक पर्यटकों की आवाजाही कम होने से छोटे दुकानदारों और अन्य स्थानीय कारोबार से जुड़े परिवारों की आय प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि पुराने रास्ते को बंद करने के बाद आवागमन के लिए कोई सुगम और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया गया है।
7 सितंबर को कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन
समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण और स्थानीय सरपंच 7 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं। ज्ञापन के माध्यम से रेलवे और प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कराने की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग है कि बंद किए गए मार्ग पर रेलवे अंडरपास (RUB), ओवरब्रिज (ROB) अथवा कोई अन्य सुरक्षित एवं सुगम वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए, ताकि पर्यटन स्थल के साथ-साथ ग्रामीणों और स्थानीय व्यवसायियों का आवागमन भी सुचारु हो सके।
10 दिन का अल्टीमेटम, समाधान नहीं हुआ तो चक्काजाम
ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का समय देने की बात कही है। उनका कहना है कि इस अवधि में संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी और संतोषजनक समाधान करें।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में रास्ते की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्रवासी अपनी आजीविका और उदरदा पर्यटन स्थल के हित में सड़क पर उतरकर चक्काजाम आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के आवागमन, रोजगार और जनसुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अब प्रशासन और रेलवे की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर ग्रामीणों की नजर है।




