रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय, छत्तीसगढ़
लुधियाना से बेहोशी की हालत में गांव पहुंचाया गया युवराज, घर पहुंचने के कुछ घंटों बाद मौत; परिजनों ने ठेकेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
बलरामपुर-रामानुजगंज। रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्य गए 17 वर्षीय आदिवासी किशोर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और नाबालिगों से काम कराने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत चेरा, थाना त्रिकुंडा निवासी युवराज सिंह लुधियाना में मजदूरी करने गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां से उसे बेहोशी की हालत में एंबुलेंस के जरिए गांव लाया गया और घर पर छोड़ दिया गया। इसके कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार ने संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।
परिजनों ने ठेकेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों के मुताबिक ठेकेदार लक्ष्मी यादव निवासी महादेवपुर और शशिकांत निवासी दुद्धी, उत्तर प्रदेश करीब तीन महीने पहले युवराज को काम दिलाने के नाम पर लुधियाना ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि युवराज की उम्र महज 17 वर्ष थी और उसे पाइपलाइन से जुड़े भारी काम में लगाया गया।
परिवार का यह भी आरोप है कि मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बेहोशी की हालत में घर पहुंचाने का आरोप
परिजनों के अनुसार 5 सितंबर को लुधियाना से एक एंबुलेंस युवराज को लेकर गांव पहुंची। आरोप है कि किशोर उस समय बेहोशी की हालत में था और उसे घर में छोड़कर एंबुलेंस वहां से चली गई। परिवार के सदस्य जब घर पहुंचे तो युवराज बेसुध अवस्था में पड़ा मिला।
परिजनों के मुताबिक शाम करीब 7 बजे युवराज ने दम तोड़ दिया। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि रास्ते में उसकी तबीयत गंभीर थी तो उसे अस्पताल में उपचार क्यों नहीं दिलाया गया और परिजनों को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
नाबालिग से काम कराने के आरोप ने बढ़ाई चिंता
मामले में सबसे गंभीर पहलू युवराज की उम्र और उससे कराए जा रहे काम को लेकर सामने आया है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि 17 वर्षीय किशोर से जोखिमपूर्ण या भारी निर्माण कार्य कराया गया था, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का सवाल उठेगा।
घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि दूसरे राज्य में मजदूरी के लिए ले जाए जा रहे नाबालिगों की निगरानी और पंजीयन व्यवस्था कितनी प्रभावी है। ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले मजदूर पलायन के दौरान ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है।
पुलिस चौकी में नामजद शिकायत
मृतक के पिता सुदामा सिंह ने डिण्डो पुलिस चौकी में दोनों कथित ठेकेदारों के खिलाफ नामजद शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। परिवार चाहता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर युवराज की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग की ओर से भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है।
मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और मुआवजे की मांग
परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड से कराने की मांग की है, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सके। इसके साथ ही परिवार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता और अंतरिम मुआवजे की मांग भी रखी गई है।
परिजनों का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।
अंतिम संस्कार को लेकर परिजनों का कड़ा रुख
परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले में ठोस कानूनी कार्रवाई और न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक युवराज का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इस रुख के बाद प्रशासन और पुलिस के सामने मामले को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने की चुनौती है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
युवराज की मौत से जुड़े आरोप बेहद गंभीर हैं। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि किशोर को किस परिस्थिति में लुधियाना ले जाया गया, वहां उससे किस प्रकार का काम कराया गया, उसकी तबीयत कब और कैसे बिगड़ी तथा गांव तक पहुंचाने से पहले उसे चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिली।
मामले की निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत की वास्तविक परिस्थितियों तथा लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।


