राखड़ के कहर पर प्रशासन मौन: प्यास से तड़प रहे ग्रामीण, सुध लेने तक नहीं पहुंचे अफसर; फूटने को तैयार है आक्रोश का ज्वालामुखी!

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विकास के नाम पर बरपाली और गदगांव में मौत बांट रहे नवदुर्गा और रुपाणा धाम प्लांट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं, बूंद-बूंद साफ पानी को मोहताज हुए ग्रामीण और बेजुबान मवेशी..

रायगढ़/दैनिक खबर सार@दीपक शोभवानी :- रायगढ़ जिले के बरपाली और गदगांव में नवदुर्गा प्लांट, रुपाणा धाम प्लांट और उनके चहेते ठेकेदार रोहतास नेहरा द्वारा रचे गए मौत के खेल का पर्दाफाश होने के बावजूद, जिले की अफसरशाही गहरी कुंभकर्णी नींद में सो रही है। फ्लाई ऐश (राखड़) के जहरीले डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुके जीवनदायी नाले की खौफनाक हकीकत सामने आने के बाद भी अब तक न तो प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौके पर पहुंचा है और न ही पर्यावरण विभाग के किसी अधिकारी ने इन पीड़ित ग्रामीणों की सुध लेने की जहमत उठाई है।

एक तरफ हुक्मरान अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर फाइलों में ‘सब चंगा सी’ का खेल खेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गांव के लोग और उनके बेजुबान मवेशी साफ पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि औद्योगिक घरानों के रसूख के आगे पूरा प्रशासनिक अमला नतमस्तक हो चुका है।

कुंभकर्णी नींद में डूबा प्रशासन और वातानुकूलित कमरों से चलता मौत का व्यापार..

‘दैनिक खबर सार’ द्वारा इस महाविनाश को प्रमुखता से उजागर किए जाने के बाद यह पूरी उम्मीद थी कि प्रशासन तुरंत हरकत में आएगा और ग्रामीणों को इस जहरीले दलदल से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा। लेकिन विडंबना देखिए, खबर प्रकाशित होने और मामले के तूल पकड़ने के बाद भी न तो राजस्व विभाग की कोई टीम मौका-मुआयना करने पहुंची और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने इस जहरीले पानी और राखड़ का सैंपल लेने की जरूरत समझी।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब उनके गांव का पानी पूरी तरह से काला और जानलेवा जहर में बदल चुका है, तब अधिकारियों का यह उदासीन रवैया उनकी ठेकेदार रोहतास नेहरा और उद्योगपतियों से गहरी साठगांठ की ओर सीधा इशारा करता है। यह अब किसी से छिपा नहीं है कि प्रशासन ने इन रसूखदार घरानों के सामने पूरी तरह से घुटने टेक दिए हैं और उन्हें आम जनता की जान से ज्यादा प्लांट मालिकों के मुनाफे की फिक्र है।

बूंद-बूंद पानी को मोहताज हुए ग्रामीण और तड़पते बेजुबान मवेशी..

जमीनी हालात अब पूरी तरह से बेकाबू और अमानवीय हो चुके हैं। बरपाली, गदगांव और इसके आसपास के दर्जनों गांवों के जिन ग्रामीणों और मवेशियों की प्यास इसी सदियों पुराने नाले के पानी से बुझती थी, आज वे भयंकर जल संकट से जूझने को मजबूर हैं। नाले में अब पानी की जगह केवल गाढ़ी, काली और जहरीली राख बह रही है। प्यास से व्याकुल बेजुबान मवेशी जब अपनी प्यास बुझाने इस नाले की ओर जाते हैं, तो राख की भयंकर दुर्गंध और जहर के कारण वे बिना पानी पिए ही लौट आते हैं।

कई मवेशियों के बीमार पड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं। वहीं, ग्रामीण इस दूषित पानी के कारण चर्म रोग, उल्टी-दस्त और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों के साये में जीने को विवश हैं। उनके पास निस्तारी और पीने के पानी का कोई दूसरा साफ विकल्प नहीं बचा है। पानी के लिए तरसते इन ग्रामीणों की हालत देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

बेबसी की जगह ले रहा है भयंकर आक्रोश, बगावत की बन रही रणनीति..

प्रशासन की इस घोर संवेदनहीनता और अनदेखी ने अब ग्रामीणों के सब्र का बांध पूरी तरह से तोड़ दिया है। जो ग्रामीण कल तक अपनी बर्बादी पर केवल बेबस नजर आ रहे थे, आज उनकी आंखों में अपने उजड़ते गांव और छिनते पानी को लेकर भयंकर आक्रोश सुलग रहा है। गांव की चौपालों पर अब पंचायत के उन भ्रष्ट नुमाइंदों, ठेकेदार रोहतास नेहरा और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ सीधी बगावत की रणनीति तैयार की जा रही है। ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है और उनका साफ कहना है कि यदि प्रशासन उनके जीवन के साथ यूं ही खिलवाड़ करता रहा, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

आने वाले दिनों में यह आक्रोश एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। ग्रामीण अब कलेक्ट्रेट का घेराव करने, प्लांट की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम करने और अपनी जान की बाजी लगाकर इस विनाशकारी राखड़ परिवहन को रोकने का मन बना चुके हैं। जब सिस्टम जनता को मरने के लिए छोड़ देता है, तो जनता को अपनी रक्षा के लिए खुद ही सड़कों पर उतरना पड़ता है।

अब भी खुलेआम घूम रहे मौत के सौदागर, कठोर कार्रवाई की दरकार..

आज सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि हजारों लोगों की जिंदगी को दांव पर लगाने वाले ठेकेदार रोहतास नेहरा और नवदुर्गा व रुपाणा धाम प्लांट के प्रबंधकों पर हत्या के प्रयास और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई कब होगी? क्या रायगढ़ का प्रशासन किसी बड़ी महामारी के फैलने या प्यास और जहर से किसी बेगुनाह की मौत का इंतजार कर रहा है? ‘दैनिक खबर सार’ एक बार फिर जिला प्रशासन को सचेत करता है कि वह ग्रामीणों के इस सुलगते आक्रोश को हल्के में लेने की भूल कतई न करे।

प्यास से तड़पते इंसान और मवेशियों की आह इस भ्रष्ट तंत्र को बहुत भारी पड़ेगी। यदि समय रहते इस जहरीले नाले की सफाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू नहीं कराया गया, दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया और ग्रामीणों के लिए तत्काल स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो रायगढ़ का यह इलाका जल्द ही एक उग्र जन-आंदोलन का गवाह बनेगा। इस पूरे बवाल और बिगड़ती कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ जिला प्रशासन और शासन की होगी।

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