इस कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में चार आमंत्रित व्याख्यान दिए गए।

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मेडटेल (Med Tel) हेल्थकेयर के सह-संस्था पक और सीईओ डॉ. ललित मानिक ने “प्रौद्योगिकी का उपयोगः 21वीं सदी में सार्वजनिक स्वास्थ्य को उन्नत बनाने के लिए एआई और डिजिटल स्वास्थ्य” पर एक व्याख्यान दिया। ओडिशा सरकार के पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बालकृष्ण पांडा ने “समग्र स्वास्थ्य में स्वास्थ्य सूचना और शिक्षा के एकीकृत दृष्टिकोण” पर एक विचारशील व्याख्यान दिया। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य साक्षरता को संबोधित करने के महत्व पर भी चर्चा की।

यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ श्री सौरव भट्टाचार्य ने “पोषण में निवेशः स्वास्थ्य में सुधार और स्वास्थ्य सेवा की लागत को कम करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप” पर एक व्याख्यान दिया। एनआईटी राउरकेला के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रत्नाकर दाश ने “स्वास्थ्य सेवा में एआई का एकीकरण” पर चर्चा की और स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी के भविष्य पर मूल्यवान दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में “युवा आवाज़ेंः कार्य योजना के लिए बातचीत” शीर्षक से एक इंटरैक्टिव सत्र भी शामिल था, जिसमें प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त अंतर्दृष्टि के आधार पर क्रियान्वयन योग्य कदमों की पहचान के लिए समूह चर्चाओं में भाग लिया।

सत्र ने शैक्षिक संदर्भों में परिवर्तनों को लागू करने और निरंतर सहयोग और ज्ञान साझा करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. जलंधर प्रधान के समापन संबोधन के साथ हुआ जिसमें कार्यशाला से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों और अंतर्दृष्टियों को संक्षेप में प्रस्तुत किया।

एनआईटी राउरकेला में “विकसित भारत @2047” कार्यशाला एक बड़ी सफलता थी, जिसने 2047 तक एक स्वस्थ और अधिक शिक्षित भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान किया।

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