तहसील न्यायालय में 24 अक्टूबर को पेशी से पहले हुई कार्रवाई पर सवाल, सरकारी जमीन पर कब्जे की आशंका जताकर पीड़ितों ने मांगी निष्पक्ष जांच
रायगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के किनारे बांजीपाली और छातामुड़ा की सीमा पर जमीन विवाद को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि तहसील न्यायालय रायगढ़ में जमीन से संबंधित प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद उनकी चाय दुकान को जेसीबी से तोड़ दिया गया और इसके बाद रातोंरात विवादित स्थल पर कंक्रीट की बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई। मामले में सरकारी जमीन पर कब्जे की आशंका भी जताई गई है। पीड़ितों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जमीन का संयुक्त सीमांकन कराने की मांग की है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, तहसील न्यायालय रायगढ़ में प्रकरण क्रमांक अ-70/2025-26 की सुनवाई 24 अक्टूबर 2026 को निर्धारित थी। आरोप है कि सुनवाई से पहले 20 और 21 अक्टूबर को जेसीबी मशीनों से पिछले तीन वर्षों से संचालित चाय दुकान को तोड़ दिया गया। इसके बाद 22 अक्टूबर की रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निर्माण सामग्री लाकर विवादित जमीन पर कंक्रीट की बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई। पीड़ितों का कहना है कि इस कार्रवाई के लिए उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया था। हालांकि, निर्माण और तोड़फोड़ की वैधानिक स्थिति की पुष्टि संबंधित आदेशों एवं प्रशासनिक अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
खसरा नंबर 156 की सरकारी जमीन को लेकर उठे सवाल
पीड़ित पक्ष ने ग्राम बांजीपाली स्थित खसरा नंबर 156 की जमीन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, राजस्व विभाग के बी-1 प्रपत्र और डिजिटल खसरा नक्शे में इस भूमि का रकबा 0.0850 हेक्टेयर दर्ज है तथा जमीन छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज बताई जा रही है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी इस जमीन के हिस्से को निजी बाउंड्रीवाल के दायरे में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें इस जमीन के अधिग्रहण या किसी अन्य वैधानिक हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज नहीं दिखाए गए हैं।
पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड, मौके की वास्तविक स्थिति और निर्मित बाउंड्रीवाल की सीमाओं का मिलान कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण निजी भूमि पर हुआ है या इसमें शासकीय जमीन भी शामिल है।
खसरा नंबर 155/2 के सीमांकन पर भी विवाद
मामले में खसरा नंबर 155/2 को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, इस भूमि का रकबा 0.1090 हेक्टेयर है और राजस्व रिकॉर्ड में पूजा अग्रवाल तथा नाबालिग राघव अग्रवाल के नाम दर्ज बताया गया है।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस खसरे के हाईवे से लगे हिस्से को छातामुड़ा हल्का, तहसील पुसौर और शेष हिस्से को बांजीपाली हल्का, तहसील रायगढ़ से संबंधित बताया जा रहा है। इसे लेकर सीमांकन की प्रक्रिया और राजस्व अभिलेखों की शुद्धता पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, सीमांकन से संबंधित पंचनामा में किसान ने अपनी असहमति भी दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि सीमाओं को लेकर स्पष्टता नहीं होने से खसरा नंबर 157/1 सहित आसपास के अन्य किसानों की जमीन भी विवाद की चपेट में आ सकती है। पीड़ित पक्ष ने दोनों हल्कों के राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त सीमांकन कराने की मांग की है।
किसान फत्तेचंद पटेल की पुश्तैनी जमीन को लेकर पुराना विवाद
शिकायत में ग्राम बांजीपाली निवासी किसान फत्तेचंद पटेल की पुश्तैनी जमीन का मामला भी उठाया गया है। किसान के अनुसार, खसरा नंबर 154/1ख/1 में दर्ज 1.85 एकड़ भूमि को लेकर पिछले 10 से 12 वर्षों से विवाद चल रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खसरा नंबर 155/1ख की आड़ में उनकी जमीन के निचले और गड्ढे वाले हिस्सों में मिट्टी तथा मलबा डालकर बार-बार सीमांकन संबंधी विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने दावा किया है कि व्यवहार न्यायालय वर्ग-1, रायगढ़ के प्रकरण क्रमांक 88-ए/2012 में 9 अगस्त 2017 को उनके पक्ष में फैसला और डिक्री पारित हुई थी। उनके अनुसार, इस फैसले की पुष्टि जिला न्यायाधीश के द्वितीय अपर न्यायालय ने भी की थी।
पीड़ित किसान का आरोप है कि न्यायालय के फैसले के बावजूद जमीन की सीमा को लेकर विवाद जारी है। इस संबंध में पुराने न्यायालयीन आदेशों, राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
तीन साल से चल रही चाय दुकान टूटने से आजीविका पर संकट
इस विवाद का सबसे गंभीर मानवीय पहलू चाय दुकान संचालक कैलाश आचार्य की आजीविका से जुड़ा है। पीड़ित के अनुसार, वह स्थानीय किसान की सहमति से पिछले तीन वर्षों से ‘जय भोले टी सेंटर’ नाम से चाय की दुकान संचालित कर रहा था। आरोप है कि इसी दुकान को जेसीबी से तोड़ दिया गया, जिससे परिवार की नियमित आय का जरिया समाप्त हो गया।
कैलाश आचार्य का दावा है कि उनके पास सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय का उद्यम पंजीयन प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी का बिजली मीटर कनेक्शन और आकलन वर्ष 2026-27 का आयकर रिटर्न उपलब्ध है। उनके अनुसार, आयकर रिटर्न में करीब 13.19 लाख रुपये का कारोबार दर्ज है। उन्होंने स्वयं को कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिक भी बताया है।
पीड़ित परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति और गंभीर है। कैलाश आचार्य के अनुसार, उनका 10 वर्षीय बड़ा बेटा शत-प्रतिशत दिव्यांग है। बच्चा न तो चल सकता है और न ही बोल पाता है। उसे नियमित रूप से दवाइयों की जरूरत होती है, जिन पर हर महीने करीब 5,000 रुपये खर्च होने का दावा किया गया है।
दुकान टूटने के बाद परिवार की आय प्रभावित होने, वाहन ऋण और अन्य कर्ज की किस्तें चुकाने तथा बच्चे के इलाज का खर्च उठाने को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि दुकान और जमीन से संबंधित कार्रवाई का विरोध करने पर उसे झूठे मुकदमों में फंसाने तथा जान से मारने की धमकियां दी गईं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
प्रशासन से संयुक्त सीमांकन और निर्माण की जांच की मांग
पूरे मामले में पीड़ित पक्ष ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में विवादित स्थल पर हुए निर्माण की वैधानिकता की जांच, खसरा नंबर 156 की सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना तथा छातामुड़ा और बांजीपाली हल्कों के राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में टोटल स्टेशन मशीन से संयुक्त सीमांकन कराना शामिल है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन था, तब निर्माण और तोड़फोड़ किस आधार पर की गई, इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से संबंधित आदेशों, सीमांकन रिपोर्ट, भूमि स्वामित्व दस्तावेजों और निर्माण से जुड़े अभिलेखों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति, बाउंड्रीवाल के निर्माण की वैधानिकता तथा दुकान तोड़े जाने के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।


