भारत-चीन के बीच बढ़ता सैन्य असंतुलन भविष्य के लिए ठीक नहीं, एलएसी पर आधुनिक चौकियां, ड्रोन और अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव तथा सैन्य क्षमताओं में बढ़ते अंतर को देखते हुए केंद्र सरकार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यह कहना है अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का। उन्होंने भारत-चीन सीमा की सुरक्षा मजबूत करने के लिए आईटीबीपी में हर साल 20 नई बटालियन गठित करने, आधुनिक संचार सुविधाओं से लैस अग्रिम चौकियां स्थापित करने और जवानों को अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।

रणबीर सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ऐसे में सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, अरुणाचल प्रदेश सहित भारत-चीन सीमा के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाओं के आमने-सामने रहने की स्थिति को देखते हुए निगरानी और सैन्य तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि चीन अपनी सेना के आधुनिकीकरण और सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जबकि भारत के प्रयास अपेक्षाकृत धीमे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सैन्य क्षमताओं का बढ़ता अंतर भविष्य के लिहाज से उचित नहीं है।
आईटीबीपी की क्षमता पर जताया भरोसा
रणबीर सिंह ने आईटीबीपी के जवानों की क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि हिमवीर कठिन परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी के जवान चीनी सेना की रणनीतियों और गतिविधियों से परिचित हैं। उनके अनुसार, कई जवान चीनी भाषा का भी ज्ञान रखते हैं और शारीरिक व मानसिक रूप से कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमा पर तैनात किए जाने वाले जवानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। रणबीर सिंह ने सवाल उठाया कि जब सीमा सुरक्षा के लिए जवानों की आवश्यकता है, तब आईटीबीपी, बीएसएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के हजारों जवानों को लंबे समय तक दिल्ली-एनसीआर में धरना-प्रदर्शनों जैसी कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी पर तैनात रखना कितना उचित है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीनों से विभिन्न केंद्रीय बलों के हजारों जवान दिल्ली-एनसीआर में तैनात हैं और यह तैनाती जारी है। उनके अनुसार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण उपलब्ध मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हर 10 किलोमीटर पर आधुनिक सीमा चौकी बनाने की मांग
रणबीर सिंह ने लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में हर 10 किलोमीटर पर आधुनिक बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) स्थापित करने की जरूरत है। इन चौकियों को बेहतर संचार सुविधाओं और आधुनिक निगरानी प्रणालियों से लैस किया जाना चाहिए।
उन्होंने अग्रिम चौकियों पर अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन तैनात करने, आईटीबीपी के जवानों को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने और अत्यधिक ठंड में काम करने के अनुकूल विशेष तकनीकी परिधानों की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सीमा के कई क्षेत्रों में तापमान शून्य से 30 से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है। ऐसी परिस्थितियों में जवानों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए आधुनिक उपकरण और विशेष कपड़े बेहद जरूरी हैं।
आईटीबीपी के लिए सालाना 50 हजार करोड़ रुपये का बजट देने की मांग
रणबीर सिंह ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आईटीबीपी में हर साल 20 नई बटालियन गठित करने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने अतिरिक्त सीमा चौकियों के निर्माण, आधुनिक निगरानी उपकरणों की खरीद और जवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आईटीबीपी को सालाना 50 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे में केवल जवानों की तैनाती बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचे, बेहतर संचार व्यवस्था और पर्याप्त बजट की भी जरूरत है।
रणबीर सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आईटीबीपी महानिदेशक की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सीमा सुरक्षा से जुड़े संसाधनों और तैयारियों की समीक्षा की जाए, ताकि देश की उत्तरी सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।
