सीनियर प्राचार्यों की याचिका वापस, हाईकोर्ट के रुख के बाद DEO के रूप में रामेश्वर जायसवाल के पदस्थ रहने का रास्ता साफ
बिलासपुर। बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी यानी DEO की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई है। इसके साथ ही उनकी नियुक्ति पर लगी अंतरिम रोक भी हटा दी गई है। अदालत की सुनवाई के दौरान सीनियरिटी के आधार पर प्रशासनिक पद के प्रभार पर किए गए दावे को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई।
सीनियरिटी के आधार पर DEO पद का दावा कितना मजबूत?
इस मामले में जिले के प्राचार्य राघवेंद्र गौराहा और कामेश्वर बैरागी ने याचिका दायर कर रामेश्वर जायसवाल की पदस्थापना को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि जिले में सौ से अधिक प्राचार्य ऐसे हैं, जो रामेश्वर जायसवाल से कई वर्ष सीनियर हैं। ऐसे में जूनियर अधिकारी को DEO का प्रभार देने और सीनियर प्राचार्यों की गोपनीय चरित्रावली लिखने का अधिकार देने पर आपत्ति जताई गई थी। इसी विवाद के बीच हाईकोर्ट ने पहले अंतरिम रोक लगाई थी।
हाईकोर्ट ने प्रशासनिक प्रभार को लेकर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.डी. गुरु की बेंच ने प्रशासनिक पद के प्रभार को लेकर महत्वपूर्ण रुख स्पष्ट किया। अदालत के अनुसार किसी पद का प्रभार सौंपना शासन की अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था हो सकती है। जब तक संबंधित नियम किसी विशेष व्यक्ति को ऐसा पद पाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देते, केवल वरिष्ठता के आधार पर प्रशासनिक प्रभार पर कानूनी दावा नहीं किया जा सकता। Bilaspur DEO Rameshwar Jaiswal मामले में अदालत की यह टिप्पणी विवाद के केंद्र में रही।
याचिका खारिज होने से पहले ही वापस लेने की अनुमति
सुनवाई के दौरान गरियाबंद प्रभारी DEO से जुड़े पुराने न्यायिक आदेशों का भी उल्लेख हुआ। अदालत के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका को खारिज किए जाने के बजाय वापस लेने की अनुमति मांगी गई। हाईकोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही Bilaspur DEO Rameshwar Jaiswal की नियुक्ति पर लगी अंतरिम रोक हट गई और उनके DEO पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया।
शिक्षक संगठन ने फैसले का किया स्वागत
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने हाईकोर्ट के रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदों पर केवल सीनियरिटी नहीं, बल्कि कार्यकुशलता और दक्षता भी महत्वपूर्ण होती है। उनके मुताबिक अदालत का यह रुख प्रशासनिक व्यवस्था के हित में है। Bilaspur DEO Rameshwar Jaiswal की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट की कार्यवाही से फिलहाल कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है।
रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
