वन संपदा की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने चौकीदार और उसके सहयोगियों पर लगाया तस्करी को संरक्षण देने का आरोप
जंगल में खुलेआम कटाई और परिवहन का आरोप
बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के सनवाल थाना क्षेत्र अंतर्गत धमनी वन परिक्षेत्र में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम डूमरपान के करवनिया जंगल में ग्रामीणों ने बेशकीमती सागौन पेड़ों की कथित कटाई और दिनदहाड़े परिवहन का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने की गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं, जिससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, Dhamni teak smuggling मामले में जंगल की सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

तस्करों को रोकने पर विवाद, चौकीदार के बेटे पर धमकी का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने जंगल से सागौन की लकड़ी ले जा रहे लोगों को रोककर पूछताछ की, तो मौके पर मौजूद चौकीदार श्यामलाल के बेटे उपेंद्र और उसके साथी जगदीश ने कथित तौर पर ग्रामीणों से अभद्रता की। आरोप है कि उपेंद्र ने अपने पिता के चौकीदार होने का हवाला देते हुए ग्रामीणों को कार्रवाई की धमकी दी। ग्रामीणों ने इस घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि Dhamni teak smuggling की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले मैदानी अमले से जुड़े व्यक्ति के परिवार पर ही यदि वन संपदा के अवैध दोहन को संरक्षण देने के आरोप लगते हैं, तो यह वन विभाग की निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। ग्रामीणों का आरोप है कि करवनिया जंगल में सागौन की कटाई और उसके परिवहन को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में Dhamni teak smuggling मामले में वन विभाग के उच्चाधिकारियों से स्थल निरीक्षण और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चौकीदार श्यामलाल, उसके बेटे उपेंद्र और उनके बताए गए सहयोगी जगदीश की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग रखी है। साथ ही जंगल में सागौन की कटाई, लकड़ी के परिवहन और कथित संरक्षण से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच करने की अपील की गई है।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। यदि जांच में वन संपदा की अवैध कटाई या तस्करी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वन एवं अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत और आरोपों ने धमनी रेंज में वन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर, छत्तीसगढ़
