बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर स्टेशन में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) के. श्रीनिवास ने की। इस अवसर पर मुख्य स्टेशन प्रबंधक आशुतोष कुमार ठाकुर तथा मुख्य क्रू कंट्रोलर पी. नागेश्वर राव सहित बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके बाद अतिथियों ने मुंशी प्रेमचंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
प्रेमचंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार
इस अवसर पर श्रीमती विद्यावती कुमारी, कनिष्ठ लिपिक, मुख्य यार्ड मास्टर कार्यालय, बिलासपुर ने प्रेमचंद के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
मुख्य क्रू कंट्रोलर पी. नागेश्वर राव ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया। उनकी रचनाओं में यथार्थ, संघर्ष और सामाजिक चेतना का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद की रचनाएं
मुख्य स्टेशन प्रबंधक आशुतोष कुमार ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने समाज की वास्तविक समस्याओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सामने लाकर लोगों को नई सोच दी।
मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान
अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी के. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य के माध्यम से संवेदनशीलता, न्याय और मानवता का संदेश दिया। उनकी रचनाएं आज भी समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं।
उन्होंने कर्मचारियों से मुंशी प्रेमचंद के आदर्शों और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने तथा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।




