बिना सर्वे और ग्रामसभा की मंजूरी के गांवों को जोड़े जाने का आरोप, अधिवक्ता ने सौंपा ज्ञापन
पेण्ड्रा/जीपीएम। नवगठित सकोला तहसील को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पेंड्रा तहसील के 10 से अधिक गांवों को सकोला तहसील में शामिल किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता शिव चरण पसारी ने जिलाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर इन गांवों को पुनः पेंड्रा तहसील में शामिल करने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नई तहसील के गठन के दौरान न तो समुचित सर्वेक्षण कराया गया और न ही संबंधित ग्रामसभाओं से अभिमत लिया गया। ऐसे में ग्रामीणों की सुविधा और जनभावनाओं की अनदेखी कर प्रशासनिक निर्णय लिया गया।
ग्रामीणों की सहमति के बिना तहसील सीमा बदले जाने पर उठे सवाल
जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही निवासी अधिवक्ता शिव चरण पसारी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नई तहसील सकोला के गठन के दौरान पेंड्रा और मरवाही तहसील के कई गांवों को शामिल कर दिया गया था।
ज्ञापन के अनुसार पेंड्रा तहसील के बारीउमराव, टंगियामार, घघरा, मुरमुर, बेंदरचुआ, घाटवहरा, कोड़गार, कनईबहरा और बम्हनी सहित कई गांवों को सकोला तहसील में जोड़ा गया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में ग्रामीणों की राय नहीं ली गई और न ही जमीनी परिस्थितियों का आकलन किया गया।
तहसील मुख्यालय तक पहुंचना बना चुनौती, प्रमाणपत्र बनवाने में हो रही परेशानी
ग्रामीणों की ओर से ज्ञापन में बताया गया है कि वर्षों से इन गांवों का प्रशासनिक और राजस्व कार्य पेंड्रा तहसील से संचालित होता रहा है। वर्तमान व्यवस्था में लोगों को सकोला तहसील तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेष रूप से छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों को आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश पटवारी पेंड्रा में निवास करते हैं, जिससे लोगों को सकोला और पेंड्रा के बीच भटकना पड़ता है।
सर्वे और ग्रामसभा की सहमति के बाद ही हो सीमांकन, ग्रामीणों के हित में कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता शिव चरण पसारी ने ज्ञापन में मांग की है कि संबंधित गांवों का पुनः सर्वेक्षण कराया जाए तथा ग्रामसभाओं का अभिमत प्राप्त करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुविधा और क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए इन गांवों को पुनः पेंड्रा तहसील में शामिल किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में जिलाध्यक्ष से मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।


