रायगढ़ में ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान बना बदलाव की मिसाल, 36 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

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रायगढ़ | 01 जून 2026

जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार देने का सफल मॉडल बन रहा अभियान

रायगढ़ जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव, मोर तरिया’ और ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से जहां जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं हजारों ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।

500 से अधिक कार्यों में प्रतिदिन 36 हजार से ज्यादा श्रमिक कर रहे काम

कलेक्टर के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन में जिलेभर में जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्य प्राथमिकता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 500 से अधिक कार्य प्रगति पर हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन 36 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।

तालाब गहरीकरण, डबरी निर्माण और नाला उपचार पर विशेष जोर

अभियान के तहत तालाबों का गहरीकरण, पुराने जलाशयों का जीर्णोद्धार, खेत तालाब और डबरी निर्माण, नाला उपचार, कंटूर ट्रेंच निर्माण, मेडबंधान तथा जल निकासी संरचनाओं का विकास जैसे कार्य बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी जल उपलब्धता बढ़ाना है।

गांव में ही काम मिलने से पलायन पर लग रही रोक

स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से ग्रामीणों को काम की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा है। इससे न केवल परिवारों की आय बढ़ रही है बल्कि गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है। मनरेगा और वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 के समन्वय से संचालित यह अभियान ग्रामीण आजीविका सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है।

भूजल स्तर बढ़ने से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

जल संरक्षण कार्यों में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। तालाबों और डबरियों के निर्माण के साथ-साथ स्टॉप डेम, कंटूर ट्रेंच और मेडबंधान जैसे कार्य भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।

भविष्य की जल सुरक्षा और आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि विकास और भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह अभियान आने वाले वर्षों में सूखा जैसी चुनौतियों से निपटने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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