दो दशकों की यात्रा के बाद भी पृथ्वी संरक्षण की चुनौती बरकरार

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विश्व पृथ्वी दिवस को मनाते हुए लगभग दो दशक बीत चुके हैं। इस अवधि में पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की सोच और जागरूकता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। आज अधिक लोग प्रकृति के महत्व को समझ रहे हैं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में अपने स्तर पर प्रयास भी कर रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद कई चुनौतियां अभी भी हमारे सामने बनी हुई हैं।

यदि हम अपने आसपास के वातावरण पर नजर डालें तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि लोगों में पेड़ लगाने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके बावजूद प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, बढ़ता वायु और जल प्रदूषण तथा प्राकृतिक जल स्रोतों का लगातार कम होना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

एक छात्रा के दृष्टिकोण से देखा जाए तो छोटे-छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति पानी और बिजली की बचत करने, अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की आदत विकसित करे, तो पृथ्वी संरक्षण की दिशा में प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।

बीते वर्षों की यह यात्रा हमें यह संदेश देती है कि केवल एक दिन पृथ्वी दिवस मनाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक बदलाव तब आएगा जब पर्यावरण संरक्षण को हमारी दैनिक जीवनशैली और व्यवहार का स्थायी हिस्सा बनाया जाएगा। यही भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और पृथ्वी के प्रति हमारा कर्तव्य है।

लेखिका: गार्गी सिंह, कक्षा पाँचवीं
बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत (बिलासपुर)

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