अंतरराष्ट्रीय काव्य उत्सव में गूंजी सौ से अधिक कवियों की आवाज, नक्सलमुक्त बस्तर के लिए दिया साहित्यिक संदेश

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रायपुर। देश-विदेश के कवियों की मौजूदगी में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय काव्य उत्सव

भाषा अस्मिता अकादमी और जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान ने छत्तीसगढ़ मित्र के सहयोग से विमतारा में अंतरराष्ट्रीय काव्य उत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम में देश-विदेश के सौ से अधिक कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ करते हुए नक्सलमुक्त बस्तर के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उत्सव में अमेरिका सहित देश के विभिन्न शहरों से साहित्यकारों और कवियों ने भागीदारी की।

भारतीय और अमेरिकी कविता की संवेदनाओं पर डॉ अनीता कपूर ने रखे विचार

अमेरिका से पहुंचीं कवयित्री डॉ अनीता कपूर ने भारतीय और अमेरिकी कवियों के लेखन संसार पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत में रिश्ते, संस्कृति और परंपरा के साथ संवेदना जुड़ी हुई है, जबकि अमेरिका की कविताओं में आधुनिकता, स्त्री मुक्ति, वैयक्तिकता और संवेदना समान रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भारत की कविता आत्मा को छूती है, जबकि अमेरिका की कविता आत्मा को जागृत करती है। संवेदना मूल रूप से कविता की आत्मा है और यह दुनिया के हर हिस्से में मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ के कवि लोक जीवन की आत्मीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देते हैं।

बदलते बस्तर और सांस्कृतिक संरक्षण पर साहित्य अकादमी अध्यक्ष ने रखी बात

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि बदलते बस्तर को सही स्वरूप में आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर से सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त हुआ है, लेकिन पिछले चालीस वर्षों में वहां की संस्कृति और सभ्यता को नुकसान भी पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बस्तर के सांस्कृतिक विकास में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर के आदिवासी समुदाय आज भी अपने तीज-त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाते हैं और अब बस्तर से अंधेरा दूर हो चुका है।

साझा संग्रहों और कविता की भूमिका पर वक्ताओं ने रखे विचार

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण देते हुए संयोजक डॉ सुधीर शर्मा ने बताया कि दो महत्वपूर्ण साझा संग्रह बदलता बस्तर विषय पर केंद्रित हैं। जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष डॉ सीमा निगम ने कहा कि इन पुस्तकों में कविताएं और आलेख शामिल किए गए हैं।

आलोचक और कवि जयप्रकाश मानस ने कहा कि कविता मुक्ति की मांग करती है और उस पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि कविता अपने समय और उसकी गति को अभिव्यक्त नहीं कर पाती तो वह विवेक का विस्तार नहीं कर सकती।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ अभिलाषा बेहार ने कहा कि कविता परंपराओं के निर्वाह का माध्यम है। वहीं डॉ सुशील त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य में साधारण और आम कवि ही युग निर्माण की भूमिका निभाते हैं तथा देश की असली आवाज सामान्य लोगों की कविता होती है।

डॉ आनंद प्रकाश त्रिपाठी सागर ने कहा कि एक कवि को निरंतर स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए क्योंकि कविता निरंतर अभ्यास की मांग करती है। आगरा से पहुंचीं निमिषा सिंघल ने कहा कि महिलाएं संवेदनाओं का सागर होती हैं। कार्यक्रम को डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग, युक्ता राजश्री सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।

दो सत्रों में हुआ काव्य पाठ, बाल कवयित्री ने दोहों से बांधा समां

दो सत्रों में सौ से अधिक कवियों ने काव्य पाठ किया। अमेरिका के अलावा सागर, लखनऊ, आगरा, मुंबई और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से कवियों ने भाग लिया। बस्तर से पहुंचे कवियों ने हलबी भाषा में गीत प्रस्तुत कर नक्सलमुक्त बस्तर का स्वागत किया।

कार्यक्रम में डॉ रश्मिलता मिश्र और शशि दुबे ने विशेष वक्तव्य दिया। मंच संचालन डॉ सीमा अवस्थी, शुभ्रा ठाकुर, डॉ भारती यादव, सुमन शर्मा और प्रीति मिश्रा ने क्रमवार किया। कार्यक्रम में दस वर्ष की बाल कवयित्री ने दोहों का पाठ कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में डॉ सीमा निगम ने आभार व्यक्त किया।

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