माता लक्ष्मी के 1008 नामों के मंत्रोच्चारण के साथ हुई विशेष पूजा, परिवार और विश्व कल्याण की कामना
चक्रधरपुर। वेंकटेश्वर (बालाजी) मंदिर के 43वें पंचाहानिका ब्रह्मोत्सव के द्वितीय दिवस पर बुधवार को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिला। मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक कुमकुम पूजा में 150 से अधिक महिलाओं ने भाग लेकर माता लक्ष्मी की आराधना की और परिवार, समाज, देश तथा विश्व कल्याण की कामना की।

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुई विशेष पूजा
ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन तिरुपति बालाजी मंदिर, आंध्र प्रदेश से पधारे पंडित अनंतनारायनाचालर्यलु, पंडित कामेश्वर, पंडित विष्णु तेजा एवं अन्य पुजारियों द्वारा सुप्रभातम और नित्य पूजा संपन्न कराई गई। इसके बाद आंध्र एसोसिएशन के कल्याण मंडप में माता लक्ष्मी की प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के बीच स्थापित किया गया।
महिलाएं और बालिकाएं कतारबद्ध होकर कुमकुम, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री के साथ पूजा में शामिल हुईं। इस दौरान माता लक्ष्मी का जलाभिषेक किया गया तथा 1008 नामों के मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजाअर्चना संपन्न हुई।

सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना
पूजा में शामिल महिलाओं ने माता लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और समाज व देश में शांति की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण की भी कामना की।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्णाहुति में शामिल हुए और भगवान वेंकटेश्वर, माता लक्ष्मी तथा गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शाम को होगा भगवान बालाजी का विवाह उत्सव
मंदिर समिति के अनुसार बुधवार शाम मंदिर परिसर में भगवान बालाजी का पारंपरिक विवाह उत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान प्रसाद वितरण भी किया गया।
एसडीएम श्रुति राजलक्ष्मी ने लिया आशीर्वाद
ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन चक्रधरपुर की एसडीएम सह अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति Rajlakshmi भी मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर, माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
आंध्र एसोसिएशन के अध्यक्ष केकेटी राव, एम कृष्ण कुमार, टीवीएन राव, ए. जगन्नाथ डोरा और वीवीआर मूर्ति सहित अन्य पदाधिकारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ उनका स्वागत किया।
