बर्बरता की हदें पार: माँ की हत्या के बाद मासूम को ट्रेन के आगे लिटाया, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

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दुष्कर्म केस वापस लेने के दबाव में आरोपी ने रची थी खौफनाक साजिश, हाईकोर्ट बोला—“मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला अपराध”

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद सनसनीखेज और अमानवीय दोहरे हत्याकांड में दोषी आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले को “घोर बर्बरता” और “मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी” करार दिया।

दुष्कर्म केस वापस लेने के लिए बना रहा था दबाव

मामले के अनुसार आरोपी विक्की उर्फ सुखीराम यादव के खिलाफ पीड़िता ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। आरोपी जमानत पर बाहर आने के बाद लगातार पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा था।

पीड़िता ने आरोपी से पहले शादी करने की बात कही थी, जिसके बाद ही वह केस वापस लेने को तैयार थी। इसी विवाद और रंजिश के चलते आरोपी ने पूरी वारदात को अंजाम दिया।

सुनसान जगह बुलाकर गला रेतकर हत्या

22 जनवरी 2022 को आरोपी ने पीड़िता को बातचीत के बहाने एकांत स्थान पर बुलाया। वहां विवाद होने पर उसने चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।

इसके बाद आरोपी ने अपनी डेढ़ साल की मासूम बच्ची, जो उसकी जैविक पुत्री थी, का गला दबाकर उसे बेहोश किया और रेलवे ट्रैक पर लिटा दिया। कुछ ही देर बाद मालगाड़ी की चपेट में आने से बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई।

सबूत मिटाने की भी कोशिश

वारदात के बाद आरोपी ने हत्या में इस्तेमाल चाकू और मोबाइल फोन को अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पूरी सच्चाई सामने ला दी।

डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट बनी अहम सबूत

मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था, लेकिन पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत केस तैयार किया।

डीएनए जांच में यह पुष्टि हुई कि मृत बच्ची का जैविक पिता आरोपी ही था। वहीं एफएसएल जांच में आरोपी के कपड़ों पर मिले खून के धब्बों का मिलान पीड़िता के रक्त से हुआ।

इसके अलावा आरोपी ने गांव के सरपंच के सामने भी अपना जुर्म स्वीकार किया था, जिसे अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

हाईकोर्ट ने कहा—राहत की कोई गुंजाइश नहीं

हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा धारा 302 के तहत दो बार उम्रकैद, धारा 201 और पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाई गई सजा को सही ठहराया।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि आरोपी का उद्देश्य, वैज्ञानिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य तथ्यों की अटूट श्रृंखला यह साबित करती है कि अपराध बेहद निर्मम और क्रूर तरीके से किया गया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी या राहत की गुंजाइश नहीं है।

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