धरमजयगढ़ के चैनपुर कोल ब्लॉक की नीलामी शुरू, पेसा कानून की अनदेखी के आरोप, कोर्ट जाने की तैयारी

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कोयला ब्लॉकों की नीलामी तेज, रायगढ़ के चैनपुर और टेरम ब्लॉक भी सूची में शामिल

धरमजयगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर कोल ब्लॉकों की नीलामी (coal block auction) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोयला मंत्रालय द्वारा 25वें राउंड (कोल माइंस स्पेशल प्रोविज़न्स एक्ट) और 15वें राउंड (MMDR एक्ट) के तहत कुल 17 कोल ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें रायगढ़ जिले के टेरम और चैनपुर कोल ब्लॉक भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय आदिवासी क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है।


पहले भी जनसुनवाई टली थी, ग्रामीणों ने जताया था कड़ा विरोध

चैनपुर कोल ब्लॉक को लेकर ग्रामीणों का विरोध नया नहीं है। मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स से जुड़े इस प्रोजेक्ट के खिलाफ पहले भी जबरदस्त विरोध हुआ था, जिसके चलते 11 नवंबर 2025 को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित करना पड़ा था। उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु ने पुरुंगा में आयोजित सभा में धरमजयगढ़ और छाल रेंज के जंगलों में प्रस्तावित 18 कोल ब्लॉकों से करीब 52 ग्राम पंचायतों के प्रभावित होने की बात उठाई थी।


ग्राम सभा की अनुमति बिना नीलामी पर सवाल, पेसा कानून के उल्लंघन के आरोप

अब अचानक चैनपुर कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है। ग्राम पंचायत तेंदूमुड़ी के आश्रित गांव चैनपुर में यह प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, जबकि अन्य 11 ब्लॉकों की नीलामी अभी बाकी है। यह पूरा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत आता है, जहां किसी भी परियोजना के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होती है। इसके बावजूद नीलामी आगे बढ़ाए जाने पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कानून की अनदेखी का आरोप लगाया है।


हजारों ग्रामीणों ने निकाली थी रैली, ज्ञापन के बावजूद कार्रवाई नहीं

बीते 29 दिसंबर 2025 को करीब पांच हजार ग्रामीणों ने रैली निकालकर धरमजयगढ़ एसडीएम के माध्यम से केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय और वन मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।


कोर्ट जाने की चेतावनी, पर्यावरण और वन्य जीवों पर खतरे की चिंता

सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नीलामी प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल या सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि जंगल, पर्यावरण और वन्य जीवों, विशेष रूप से हाथियों के अस्तित्व से जुड़ा मामला है।


ग्रामीणों का आंदोलन तेज करने का संकेत, प्रशासन पर दबाव बढ़ने की संभावना

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन उनकी मांगों को नजरअंदाज करता रहा, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में धरमजयगढ़ क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर संघर्ष और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

 

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