
रायगढ़ में जूटमिल पुलिस का अवैध शराब पर धमाकेदार प्रहार, पर भट्टी वालों की बेखौफी बरकरार!
रायगढ़ : अवैध शराब के खिलाफ जंग में जूटमिल पुलिस ने एक बार फिर कमर कसी। 20 जून को दुर्गा चौक पर ताबड़तोड़ घेराबंदी कर गांधीनगर के रजत महिलाने को रंगे हाथों धर दबोचा। रजत की एक्टिवा (CG 13 BB 9041) से 30 पाव गोवा व्हिस्की और 30 पाव देशी शराब, कुल 6000 रुपये कीमत की, बरामद हुई। शराब के साथ 50,000 रुपये की एक्टिवा भी जब्त! आरोपी कोई वैध कागज या जवाब नहीं दे सका, लिहाजा आबकारी अधिनियम की धारा 34(2), 59(क) के तहत जेल की सैर पर भेजा गया।
थाना प्रभारी प्रशांत राव की मुखबीर सूचना पर उप निरीक्षक गिरधारी साव, प्रधान आरक्षक सतीश पाठक, और आरक्षक लकेश्वर पुरसेठ व शशिभूषण उरांव की टीम ने ये कार्रवाई अंजाम दी। सूत्रों के मुताबिक, रजत सारंगढ़ बस स्टैंड की शराब दुकान से ये खेप लाकर अवैध बिक्री की फिराक में था।
मगर सवाल वही—शराब भट्टी वालों पर कब लगेगा शिकंजा?: पुलिस का ये एक्शन तारीफ-ए-काबिल है, जैसा कि हाल ही में 503 लीटर शराब जब्त कर 44 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजने से जाहिर है। लेकिन बड़ा सवाल शराब भट्टी वालों पर कार्रवाई का है। इतनी भारी मात्रा में शराब बिना किसी बड़े नेटवर्क के कैसे सड़कों तक पहुंचती है? आखिर भट्टी संचालकों की बेखौफी का राज क्या? स्थानीय लोग चर्चा करते हैं कि बिना ‘मिलीभगत’ के इतना बड़ा खेल मुमकिन नहीं।
नियम साफ हैं, मगर भट्टी वालों पर कार्रवाई की सुस्ती संदेह पैदा करती है। रायपुर के लालपुर शराब भट्टी में 203 पेटी मिलावटी शराब और 29 लाख की गड़बड़ी पकड़े जाने का मामला इसका गवाह है। फिर रायगढ़ में चुप्पी क्यों? क्या भट्टी वाले ‘पावरफुल सेटिंग’ के दम पर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं?
जनता की पुकार—जड़ तक जाओ!: जूटमिल पुलिस की सक्रियता से अवैध तस्करी पर कुछ लगाम जरूर लगी, लेकिन शराब का स्रोत—यानी भट्टी वाले—अब तक बचे हुए हैं। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं, “तस्कर तो पकड़े जा रहे, मगर असली मास्टरमाइंड कब निशाने पर आएंगे?” आबकारी विभाग और पुलिस से अपेक्षा है कि वो इस काले कारोबार की जड़ तक जाएं।
रायगढ़ की जनता की नजर अब पुलिस के अगले कदम पर टिकी है। क्या शराब भट्टी वालों पर तलवार चलेगी, या ये नशे का खेल यूं ही चलता रहेगा? समय बताएगा, मगर सवाल गूंज रहा है—कानून का डंडा सब पर बराबर कब?
अंत में: पुलिस अधीक्षक से लेकर थाना स्तर तक अवैध शराब के खिलाफ अभियान जारी है, लेकिन जब तक भट्टी वालों पर शिकंजा नहीं कसेगा, ये जंग अधूरी रहेगी। रायगढ़ को नशे के जाल से मुक्त कराने के लिए अब सख्ती और पारदर्शिता की जरूरत है।




