
श्वेता दीवान ने CGPSC सिविल जज परीक्षा में टॉप किया, दुधमुंहे बच्चे के साथ की तैयारी
रायपुर: श्वेता दीवान ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की सिविल जज परीक्षा को ना सिर्फ पास किया, बल्कि पहले प्रयास में ही टॉप भी किया। यह उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष की कहानी है, जिसमें उनके दूसरे प्रयास में बच्चे की देखरेख के साथ तैयारी करने का शानदार उदाहरण पेश किया गया।
प्री-डिलीवरी के दौरान परीक्षा में बैठने की तैयारी
श्वेता दीवान ने दैनिक भास्कर से अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया, “मेरी जर्नी बच्चे के जन्म से पहले की है। पहले अटेम्प्ट में मैं प्रेग्नेंट थी और प्री-एग्जाम के दौरान डिलीवरी की डेट भी पास थी। इसके बावजूद मैंने प्री-डिलीवरी कराई और परीक्षा में शामिल हुई। इंटरव्यू तक पहुंची, लेकिन सिलेक्शन नहीं हो पाया।”
दूसरे प्रयास में सफलता की राह
दूसरे प्रयास में श्वेता का बच्चा सिर्फ चार महीने का था, लेकिन उन्होंने अपने बच्चे की देखभाल करते हुए सिविल जज की तैयारी की। पहले प्रयास में निराश होने के बावजूद श्वेता ने पूरी मेहनत की और अपने परिवार और भगवान के आशीर्वाद से उन्होंने सफलता प्राप्त की। श्वेता ने कहा, “मेरे पति और परिवार ने मुझे पूरा सपोर्ट किया, और इसका ही परिणाम था कि मैंने टॉप किया।”
सिविल जज बनने की प्रेरणा
श्वेता ने बताया कि शुरुआत में उनका जज बनने का कोई विचार नहीं था। “11वीं और 12वीं में मैंने मैथ्स से पढ़ाई की थी, बाद में इंजीनियरिंग की और बालको में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम किया। 2018 में शादी के बाद मैंने तय किया कि मुझे सिविल जज बनना है और 2019 में मैंने लॉ की पढ़ाई शुरू की।”
इंटरव्यू में पूछे गए सवाल
श्वेता के इंटरव्यू में उन्हें कानून से जुड़े सवाल पूछे गए, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट, RTI, इंडियन अमेंडमेंट एक्ट और विल को प्रूफ करने के विषय। श्वेता ने इन सवालों का आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया।
आने वाले फैसलों को लेकर उत्साह
सिविल जज बनने के बाद श्वेता ने कहा, “जुडिशियरी से मैं हमेशा प्रभावित रही हूं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सुनवाई ऑनलाइन देखती थी और महसूस करती थी कि यह न्याय का एक सशक्त माध्यम है। अब मैं भी इस प्रणाली में अपना योगदान देना चाहती हूं।”
CGPSC सिविल जज परीक्षा का परिणाम
CGPSC ने सिविल जज परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी किया है, जिसमें टॉप 10 में 7 लड़कियां शामिल हैं। श्वेता दीवान पहले स्थान पर हैं। कुल 49 पदों के लिए इस परीक्षा का आयोजन किया गया था, और लिखित परीक्षा के बाद 151 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।
सारांश
श्वेता दीवान की कहानी एक प्रेरणा है कि कठिनाइयों के बावजूद कड़ी मेहनत और दृढ़ विश्वास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।