बिलासपुर के ग्राम पौड़ी का मामला: राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को भेजा पत्र, फर्जी प्रमाण पत्र निरस्त कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
बिलासपुर/मस्तूरी। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पौड़ी में विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र तैयार कर 55 व्यक्तियों द्वारा शासकीय सेवा में नियुक्ति प्राप्त किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। मामले को लेकर भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने राज्यपाल छत्तीसगढ़ और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को लिखित शिकायत भेजकर राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व विधायक द्वारा भेजे गए पत्र में मामले को गंभीर बताते हुए कहा गया है कि ग्राम पौड़ी, थाना सीपत, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर में अन्य जातियों के व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र तैयार कराया गया और इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर 55 व्यक्तियों द्वारा शासकीय सेवा में नियुक्ति प्राप्त करने का आरोप है।
राज्यपाल और शासन को भेजा पत्र
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने 6 सितंबर 2026 को जारी पत्र में दो प्रमुख अधिकारियों को संबोधित किया है। पत्र की एक प्रति महामहिम राज्यपाल, छत्तीसगढ़, राजभवन को तथा दूसरी प्रति आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को भेजी गई है।
शिकायत में मांग की गई है कि मामले की जांच राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की नियुक्तियों को निरस्त करते हुए दोषियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
55 शासकीय कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
शिकायत पत्र के मुताबिक, नांगा बैगा जन शक्ति संगठन के अध्यक्ष/सचिव राम सिंह बैगा, जेड राम बैगा तथा प्रेमलाल बैगा, जिलाध्यक्ष बैगा समाज जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और अन्य बैगा समाज के पदाधिकारियों ने इस मामले की जानकारी पूर्व विधायक को दी।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित तौर पर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल कर बिलासपुर एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 55 लोगों ने सरकारी नौकरी प्राप्त की है।
हालांकि, ये आरोप अभी जांच का विषय हैं और संबंधित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्रों तथा उनकी नियुक्तियों की वैधानिकता की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा किया जाना बाकी है।
वर्ष 2025 में भी की गई थी शिकायत
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले को लेकर संबंधित लोगों द्वारा 16 सितंबर 2025 को महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन तथा अध्यक्ष, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, छत्तीसगढ़ को लिखित शिकायत की गई थी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पुनः इस मामले को शासन के समक्ष उठाते हुए राज्य स्तरीय जांच की मांग की है।
“इनका बैगा समाज से कोई संबंध नहीं” — शिकायतकर्ताओं का दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्तियों का विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। पत्र में यहां तक दावा किया गया है कि इन व्यक्तियों के पूर्वज भी कथित तौर पर संबंधित क्षेत्रों में निवासरत नहीं थे।
शिकायतकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में ग्राम के लोगों का कथित पंचनामा भी तैयार कर संलग्न किए जाने की बात कही है।
इसके अलावा बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति प्रमाण पत्रों के आधार पर तैयार की गई ग्रामवार बैगा परिवार सूची भी संलग्न किए जाने का उल्लेख पत्र में है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस सूची में सरकारी सेवा में कार्यरत बताए जा रहे 55 व्यक्तियों के नाम शामिल नहीं हैं।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
पूर्व विधायक गुलाब कमरो के पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस मामले से संबंधित विषय को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्न के रूप में उठाया जा चुका है।
इससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में गलत जानकारी अथवा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आरक्षित श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर सरकारी नौकरी हासिल की है, तो जांच के बाद प्रमाणित होने पर उसके विरुद्ध संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई के साथ-साथ नियुक्ति की वैधानिकता की भी समीक्षा हो सकती है।
अब राज्य स्तरीय जांच की मांग
पूर्व विधायक ने अपने पत्र में राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से जांच कराई जाए।
उनकी मांग है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि—
- संबंधित 55 व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुए?
- प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए?
- क्या प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक और वैध थे?
- संबंधित व्यक्तियों का बैगा जनजाति से वास्तविक संबंध है या नहीं?
- किन पदों पर और किन विभागों में इन व्यक्तियों को शासकीय नियुक्तियां मिलीं?
- नियुक्ति के समय जाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
- यदि प्रमाण पत्र गलत पाए जाते हैं तो उन्हें जारी करने तथा उनका उपयोग करने के लिए कौन जिम्मेदार है?
नियुक्ति निरस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने शिकायत के अंत में मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो फर्जी पाए गए जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त किया जाए, उनके आधार पर प्राप्त नियुक्तियों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की कथित अनियमितता की पुनरावृत्ति न हो।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता
यह पूरा मामला फिलहाल शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। दस्तावेज में लगाए गए आरोपों को अभी किसी सक्षम जांच एजेंसी या राज्य स्तरीय जाति सत्यापन समिति द्वारा प्रमाणित किया जाना शेष है। इसलिए संबंधित 55 व्यक्तियों को जांच पूरी होने से पहले दोषी मानना उचित नहीं होगा।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और क्या राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला न केवल फर्जी जाति प्रमाण पत्रों का होगा, बल्कि आरक्षित वर्ग के अधिकारों, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक सत्यापन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या 55 कथित नियुक्तियों की निष्पक्ष राज्य स्तरीय जांच होगी और यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?


