चुप्पी टूटी, झिझक छूटी: जे.के. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में गूंजा ‘जागरूक नारी’ का संदेश

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अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

आर्यन फिल्म की पहल पर छात्राओं को दी गई मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता की वैज्ञानिक जानकारी, कलेक्टर संजय अग्रवाल की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

बिलासपुर। मासिक धर्म जैसे विषय पर समाज में बनी झिझक और भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से बिलासपुर के जे.के. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में विशेष ‘जागरूक नारी’ मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। आर्यन फिल्म के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी गई।

रूढ़िवादिता नहीं, वैज्ञानिक सोच अपनाने का संदेश

अभियान के दौरान छात्राओं को बताया गया कि मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे बीमारी, अपवित्रता या शर्म का विषय मानने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है।

कार्यक्रम में छात्राओं को सैनिटरी उत्पादों के उचित चयन और सुरक्षित निपटान के साथ संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े जरूरी उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही मासिक धर्म को लेकर प्रचलित सामाजिक भ्रांतियों और अनावश्यक बंदिशों से दूर रहने का संदेश भी दिया गया।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बढ़ाया छात्राओं का आत्मविश्वास

कार्यक्रम में बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल (IAS) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने ‘जागरूक नारी’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जरूरी है कि बेटियां अपने स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े विषयों पर बिना झिझक संवाद कर सकें।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मासिक धर्म जैसे बुनियादी स्वास्थ्य विषयों पर खुलकर चर्चा होने से जागरूकता बढ़ेगी और महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित होगी।

पोस्टर विमोचन के साथ जागरूकता का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और आयोजकों ने ‘जागरूक नारी’ अभियान से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों, विशेषज्ञों और छात्राओं ने अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

आयोजकों का उद्देश्य अभियान को संस्थान तक सीमित न रखते हुए परिवार और समाज में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता और वैज्ञानिक सोच को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

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