हाथी से फसल व जनहानि होने से मुआवजा राशि बढ़ाने गोपाल अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे सुझाव पत्र

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छत्तीसगढ़ में हाथियों से हो रही फसलों की नुकसानी व वर्षों पुरानी दर 9 हजार प्रति एकड को बढ़ाकर 55 हजार प्रति एकड एवं वन्य जीव से जन हानि को 6 लाख से बढ़ाकर 15 लाख से अधिक निर्धारित हेतु सुझाव के लिए छतीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वन मंत्री व वित्त मंत्री को सुझाव पत्र लिखे हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है कि पिछले कुछ ही वर्षों में छत्तीसगढ़ में हाथियों की संख्या में वृद्धि के साथ सांथ मानव हाथी द्वंद में वृद्धि हुई है, हाथियों से फसलों के नुकसान में तुलनात्मक दृष्टि से बढोतरी हुई है।

वहीं  विगत 2016 में फसलों पर नुकसान एक एकड का मुवावजा 9 हजार प्रति एकड था जबकि धान का एम.एस.पी. रूपये 1410/- प्रति क्विंटल था। वर्तमान में सरकार की खरीदी दर बढ कर 2024 में 3100/- प्रति क्विंटल हो गई जो पूर्व की दर से लगभग 120% अधिक है। वहीं किसानों को फसलों की क्षति पूर्ति तब ही दी जाती है जब 33% से अधिक फसल का नुकसान हुआ है। इसी तरह किसानों से सरकार 21 क्विंटल प्रति एकड धान खरीदती है जो प्रति क्विंटल 3100/- के भाव से लगभग 65000/- प्रति एकड का मुल्य किसानों को प्रदाय करती है उसमें से 10 से 15 हजार भी कम कर दिया जाये तो 50 से 55 हजार रूपये किसानों को प्राप्त हो जाता है। कम मुवावजा की स्थिति में किसान उद्वेलित हो रहे हैं। गत दिवस रायगढ़ जिले के घरघोडा क्षेत्र के किसानों ने हाथियों से हुए फसल नुकसान के उचित मुवावजा को लेकर चक्का जाम कर दिया था। वहीं मानव हाथी द्वन्द इन दिनों अपने चरम सीमा पर हैं। जो हाथियों का विचरण क्षेत्र था वहां मानव तेजी से प्रवेश कर रहा है।

शिकारी छोटे छोटे जानवरों के शिकार हेतु खेतों में करेंट प्रवाह कर रहा है जिसकी चपेट में हांथी भी आ रहे हैं हाथियों को गांवों के पास के जंगलों में प्रवेश करने से ट्रेक्टर, जे.सी.बी. से रोका व खदेड दिया जा रहा है। ऐसे में हाथियों के साथ – साथ मानव भी मर रहे हैं। इसलिए निवेदन है कि हाथी से फसल नुकसान को 9000/- से बढाकर 50000/- तक एवं भुगतान 3 माह के अंतराल में करने की कृपा करें व वन्यजीव से जन हानि वर्तमान में 6 लाख है पडोसी राज्य की तर्ज पर लाख एवं समय पर करने की कार्यवाही करें।

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