अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
दवा वितरण केंद्र के विवाद के बाद डॉक्टरों के केबिन तक पहुंचा मामला, पुलिस के नाम पर धौंस दिखाने का आरोप
बिलासपुर। न्यायधानी के सिम्स अस्पताल में दवा वितरण केंद्र से शुरू हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया, जब एक युवक कथित तौर पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के केबिन तक पहुंच गया। युवक पर कर्मचारियों से अभद्रता और धमकी देने का आरोप है। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि युवक ने खुद को गोड़पारा निवासी प्रियांशु मिश्रा बताया और बातचीत के दौरान सिविल लाइन थाना प्रभारी से रिश्तेदारी होने का दावा करते हुए कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की।
दवा वितरण केंद्र से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत दवा वितरण खिड़की पर हुई बताई जा रही है। युवक ने वहां बुजुर्ग मरीजों के साथ कथित बदसलूकी का आरोप लगाते हुए आपत्ति जताई। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और युवक अस्पताल के अंदर डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के केबिन तक पहुंच गया।
वायरल वीडियो में युवक कथित तौर पर ऊंची आवाज में कर्मचारियों से बहस करते और उन्हें बाहर ले जाकर मारने की धमकी देते नजर आ रहा है। वह अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से बुजुर्ग मरीजों से माफी मांगने की बात भी कहता दिखाई देता है।
पुलिस अधिकारी से रिश्तेदारी का दावा
वीडियो में युवक द्वारा खुद को शहर का रहने वाला बताते हुए पुलिस अधिकारी से रिश्तेदारी का दावा किए जाने की बात सामने आई है। उसने कथित तौर पर कहा कि सिविल लाइन थाना प्रभारी उसका मौसा है।
हालांकि, युवक द्वारा किया गया यह दावा वास्तविक है या केवल दबाव बनाने के लिए किया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यही वजह है कि मामले में पुलिस की ओर से तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉक्टर और कर्मचारी रहे असहज
घटना के दौरान केबिन में मौजूद डॉक्टर और अन्य कर्मचारी युवक को शांत कराने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में रोज बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे माहौल में यदि कोई व्यक्ति केबिन में पहुंचकर स्वास्थ्यकर्मियों को धमकाता है, तो इससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना पैदा होना स्वाभाविक है।
सिम्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह है कि विवाद बढ़ने के बावजूद युवक डॉक्टरों और कर्मचारियों के केबिन तक कैसे पहुंच गया और मौके पर सुरक्षा कर्मियों की प्रभावी मौजूदगी क्यों नहीं दिखाई दी।
अस्पताल में संवेदनशील स्थानों, दवा वितरण केंद्रों और डॉक्टरों के कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन से जवाब की मांग उठ रही है।
पुलिस कार्रवाई को लेकर तीन अहम सवाल
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं—
पहला, क्या अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है?
दूसरा, क्या धमकी और शासकीय कार्य में कथित बाधा के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
तीसरा, युवक द्वारा पुलिस अधिकारी से रिश्तेदारी के दावे की पुलिस स्तर पर जांच की जाएगी या नहीं?
यदि युवक का दावा गलत पाया जाता है, तो पुलिस अधिकारी के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल कर दबाव बनाने के पहलू की भी जांच की जरूरत होगी।
स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर होना चाहिए स्पष्ट रुख
अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों का समाधान जरूरी है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने या विरोध करने का तरीका कानून और व्यवस्था की सीमा में होना चाहिए। डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार की धमकी या हिंसक व्यवहार को लेकर स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल जरूरी है।
अब इस मामले में पुलिस और सिम्स प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किन धाराओं के तहत कार्रवाई बनती है और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर कमी रही।




