रायपुर। राजधानी रायपुर के एमएम फन सिटी वाटर पार्क में करीब 11 साल पुराने हादसे से जुड़े उपभोक्ता मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने वेव पूल में सुरक्षा व्यवस्था में कमी और हादसे के बाद प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए वाटर पार्क प्रबंधन और संबंधित बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
हादसे में युवक के पैर की हड्डी टूटी
मामला 25 अप्रैल 2015 का है। शिकायत के अनुसार अनुपम अग्रवाल अपने परिवार और सहकर्मियों के साथ एमएम फन सिटी के वेव पूल में गए थे। इसी दौरान पूल के भीतर बनी नाली में उनका बायां पैर फंस गया। हादसे में घुटने के नीचे पैर की टिबिया और फिबुला हड्डियों में फ्रैक्चर हुआ।
प्राथमिक उपचार को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में बताया गया कि हादसे के बाद वाटर पार्क परिसर में पर्याप्त प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद साथ मौजूद लोगों ने घायल अनुपम अग्रवाल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में भी इलाज कराना पड़ा।
ऑपरेशन और अस्पताल में भर्ती रहने के बाद चिकित्सकों ने करीब तीन महीने आराम और फिजियोथेरेपी की सलाह दी। पीड़ित ने उपचार में काफी खर्च होने का दावा करते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
आयोग ने मुआवजे और ब्याज का दिया आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में 2 लाख रुपये इलाज खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। इस राशि पर 9 जुलाई 2015 से भुगतान की वास्तविक तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
इसके अलावा शारीरिक एवं मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। इस तरह ब्याज को छोड़कर कुल राशि 2.35 लाख रुपये होती है।
प्रबंधन और बीमा कंपनी की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान वाटर पार्क प्रबंधन की ओर से घटना की जिम्मेदारी से संबंधित दलीलें रखी गईं। वहीं बीमा कंपनी ने पॉलिसी किसी अन्य कंपनी के नाम होने और शिकायतकर्ता के सीधे ग्राहक नहीं होने का तर्क दिया।
आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में हादसे से जुड़े मेडिकल दस्तावेज, अस्पताल की डिस्चार्ज समरी और घटनास्थल के फोटो सहित अन्य रिकॉर्ड को भी विचार में लिया गया।
45 दिनों में भुगतान के निर्देश
आयोग ने संबंधित पक्षों को आदेश का पालन करते हुए निर्धारित मुआवजा और अन्य राशि 45 दिनों के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं। भुगतान में देरी होने की स्थिति में आदेश में निर्धारित ब्याज देय रहेगा।
यह फैसला वाटर पार्क जैसे मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय, छत्तीसगढ़




