हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़ी महिलाओं ने DRG जवानों को बांधी राखी

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नारायणपुर के DRG परिसर में दिखा अपनत्व और विश्वास, पुलिस अधिकारियों की कलाई पर भी सजा रक्षा-सूत्र

नारायणपुर, 28 अगस्त। भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन नारायणपुर पुलिस के DRG परिसर में आत्मीय और भावनात्मक माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर हिंसा और नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ी आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने DRG जवानों की कलाई पर राखी बांधी।

रक्षाबंधन के इस आयोजन में राखी केवल एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विश्वास, सुरक्षा और अपनत्व के रिश्ते का प्रतीक बनी। कभी हिंसा और बंदूक के साये में जीवन बिताने वाली ये महिलाएं अब पुलिस परिवार के साथ प्रेम और सम्मान के माहौल में रक्षाबंधन का पर्व मनाती नजर आईं।

पुलिस अधिकारियों को भी बांधा रक्षा-सूत्र

कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय साबद्रा, अजय कुमार एवं ऐश्वर्य चंद्राकर, उप पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, अविनाश कंवर, मनोज मंडावी एवं आशीष नेताम, रक्षित निरीक्षक मोहसिन खान तथा थाना प्रभारी नारायणपुर विनीत दुबे की कलाई पर भी रक्षा-सूत्र बांधा।

इस दौरान अधिकारियों और जवानों ने बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में पुलिस परिवार और आत्मसमर्पित महिलाओं के बीच आत्मीय संवाद का दृश्य भी देखने को मिला।

विश्वास और सम्मान से नई शुरुआत

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मान और अपनत्व देना तथा उनके जीवन में नई उम्मीद जगाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि नारायणपुर पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ समाज में विश्वास, भाईचारे और सकारात्मक वातावरण को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

बदलते बस्तर की तस्वीर बना आयोजन

DRG परिसर में आयोजित यह रक्षाबंधन कार्यक्रम बदलते बस्तर की एक नई तस्वीर के रूप में सामने आया। पुलिस के अनुसार, कभी हिंसा और भय से जुड़े रास्तों पर अब विश्वास, शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

आत्मसमर्पित महिला माओवादियों द्वारा जवानों और पुलिस अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधने का यह भावनात्मक क्षण शांति और सामाजिक पुनर्वास के संदेश का माध्यम बना। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और शांति, सुरक्षा, भाईचारे एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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