टिमरलगा में उमेश को मिल रहा खनिज विभाग का खुला संरक्षण, 8 से 10 एकड़ का अवैध खदान, 4 हजार टन रोज बिक्री, 250 रुपया प्रति टन रेट,8 से 10 लाख का काला धंधा

By
Advertisement
Advertisement

खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा और आर आई दीपक पटेल को लगातार सूचना देने पर भी खदान को देखना भी जरूरी नहीं समझते

सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला में खनिज ग्राम पंचायत भरपुर है। जिसका लाभ सरकार और पंचायतों को सीधा सीधा होता है, जैसे कि रॉयल्टी टेक्स जैसे सरकार और पंचायतों से विकास के रूप में आम जानता को लाभ मिलता है। वैध खनिज खनन से ग्राम पंचायत को सीधा लाभ DMF फंड में लीज धारक से रॉयल्टी का 30% अतिरिक्त जमा होता है यह पैसा सिर्फ खनन प्रभावित गांवों में खर्च होता है जैसे सड़क स्कूल पानी टंकी आंगनबाड़ी इत्यादि। पंचायत की आय पंचायत प्रस्ताव पास कर के गांव में विकास और ग्रामीण लोगों को रोजगार मिल रहा है। और शासन को लाभ रॉयल्टी जीएसटी टैक्स राजस्व वसूली जैसे लाभ मिलता हैं, जिसका शासन ने अलग अलग खनिज के लिए अलग अलग टैक्स नियम लागू किया है। और अपने राज्य से गांव को विकास से जुड़ी हुई है। लेकिन ग्राम पंचायत टिमरलगा में उमेश पटेल के द्वारा निर्धारित नियमों को धज्जियां उड़ते हुए अवैध खदान जोरों से चला रहा है जिससे सरकार को प्रति माह लाखों करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस पर अंकुश लगाने की बजाय उसने अपना कमिशन ढूंढ रहे हैं। सोचिएगा जरा अगर ऐसे ही उमेश पटेल जैसे खनन माफिया हर जिला में बढ़ता जाए तो राज्य सरकार के आर्थिक व्यवस्था क्या होगा जो महीना में करोड़ों के राजस्व के संपत्ति को खाया जा रहे हैं। जिसका संपूर्ण जवाबदारी खनिज विभाग को है लेकिन खनिज विभाग को अपने ऑफिस से निकलना भी जरूरी नहीं समझते इसके चलते आज जिला भर में ताबड़ तोड़ अवैध खदान संचालित हो रहा है।

टिमरलगा में पुष्पा भाऊ उमेश का कमाई व खनन समीकरण सामने आया है

वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत टिमरलगा में उमेश पटेल को अब पुष्पा भाऊ के नाम से जाने जाते हैं। बता दे कि उमेश पटेल के अवैध खदान पर एक साथ दस दस पोकलेन मशीन से अवैध खनन किया जाता है तथा इस पत्थर को गुड़ेली टिमरलगा के क्रशरों में पत्थर को बेचा जाता है पत्थर बेचने के लिए लगभग 20 से 25 हाईवा का इस्तेमाल किया जाता है। एक हाईवे पर लगभग 30 से 35 टन पत्थर का वजन आता है वही एक टन पत्थर भाव 250 क्रेशर संचालक को प्रति टन के हिसाब से देना पड़ता है उसे हिसाब से अगर आंकड़ा लगाया जाए तो प्रतिदिन का लगभग 4000 टन और 8 से 10 लख रुपए का कमाई सामने आई है। सोचिए जरा इतना बड़ा अवैध कांड बिना अधिकारियों के सहमति के बिना संभव है ही नहीं।

Advertisement
Share This Article