₹45 लाख के लोन घोटाले और अय्याशी का सच!

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पुलिस कार्यवाही को लेकर पीड़िता का सवाल,,अब भी संवेदनशील पुलिस अधीक्षक से न्याय की आस..

रायगढ़@दैनिक खबर सार :- जिले के घरघोड़ा पुलिस थाने से उपजा एक पारिवारिक विवाद का मामला अब केवल दो व्यक्तियों के आपसी मनमुटाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह झूठे हलफनामे, पद और वर्दी के दुरुपयोग, गंभीर वित्तीय जालसाजी और चारदीवारी के भीतर चलने वाले नैतिक पतन का ऐसा वीभत्स दस्तावेज बन चुका है जिसने पूरे प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। मीडिया के कैमरों के सामने आकर खुद को असहाय, बेबस और प्रताड़ित पति के रूप में पेश करने वाले पिंगल कुमार बघेल के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए उसकी पत्नी और पीड़िता श्रीमती सीमा बघेल ने एक आधिकारिक व विधिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हर एक मनगढ़ंत आरोप का दस्तावेजी खंडन किया है।

सीमा बघेल ने दो-दो सक्षम अदालतों के न्यायिक फैसलों, पुलिस डायरी और बैंकिंग साक्ष्यों की प्रतिलिपि सामने रखकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पिंगल बघेल केवल एक झूठा इंसान ही नहीं, बल्कि न्यायालय को गुमराह करने वाला, वित्तीय जालसाजी करने वाला और महिला कर्मचारियों का दैहिक शोषण करने वाला आदतन मुल्जिम है। इस खुलासे के बाद न्यायपालिका से लेकर पुलिस महकमे के गलियारों में खलबली मच गई है।

सीमा बघेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके सेवानिवृत्त प्राचार्य पिता, जिन्होंने शिक्षा विभाग में अपना पूरा जीवन निष्कलंक सम्मान और ईमानदारी के साथ गुजारा, उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कीचड़ उछालने के लिए पिंगल बघेल ने सुनियोजित षड्यंत्र रचा। पिंगल ने मीडिया में यह मनगढ़ंत और हास्यास्पद आरोप फैलाया था कि सीमा ने वर्ष 2010 से 2022 के बीच वैवाहिक घर की अलमारी से ₹22,63,428/- चुराए हैं।

कानूनी सिद्धांतों की भाषा में कहें तो दांपत्य जीवन के संयुक्त गृह में रहते हुए पत्नी पर चोरी का आरोप मढ़ना विधिक रूप से पूरी तरह असंभव और बेबुनियाद है, क्योंकि संयुक्त संपत्ति पर पति और पत्नी दोनों का ही साझा नियंत्रण होता है। सबसे बड़ा सवाल तो पिंगल बघेल की वित्तीय हैसियत पर उठता है कि वर्ष 2010 के दौर में क्या उसके पास घर की अलमारी में ₹22 लाख से अधिक की नकदी रखने की औकात थी? यदि उसने न्यायालय में इतनी बड़ी रकम लगातार घर पर होने का दावा किया है, तो यह सीधा-सीधा उसकी अघोषित काली कमाई का स्वयं कबूलनामा है, जिसके लिए अब वह आयकर विभाग और न्यायालय के शिकंजे में पूरी तरह घिर चुका है।

₹22 हजार की झूठी मुफलिसी का शपथ-पत्र और बैंक खातों से फूटा विलासिता का सच..

अदालत को गुमराह करने और अपने ही मासूम बच्चों के भरण-पोषण के दायित्व से भागने के लिए पिंगल बघेल ने अदालत की चौखट पर भी बेशर्मी से झूठ बोला। उसने शपथ-पत्र देकर दावा किया था कि वह महज ₹22,000/- प्रति माह कमाने वाला एक सामान्य वेल्डिंग मजदूर है। उसने खुद को लाचारी की चादर में लपेटकर न्यायाधीश महोदय की आंखों में धूल झोंकने की पूरी कोशिश की, ताकि उसे बच्चों और पत्नी के लिए एक कौड़ी भी न देनी पड़े। लेकिन कानून के लंबे हाथों से सच छिप नहीं सका। जब उसके वास्तविक बैंकिंग दस्तावेज और वित्तीय साक्ष्य अदालत के सामने आए, तो पिंगल की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई।

दस्तावेजों से साबित हुआ कि उसके व्यावसायिक खातों में ₹9,50,000/- की भारी-भरकम कैश क्रेडिट (CC) लिमिट संचालित है। इतना ही नहीं, खुद को कंगाल बताने वाला यह शख्स अकेले एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को प्रति माह ₹50,000/- की कार लोन की किस्त अदा कर रहा है। जो व्यक्ति अकेले कार की ईएमआई के रूप में ₹50,000/- हर महीने चुका सकता है, वह भला ₹22,000/- महीने कमाने वाला मजदूर कैसे हो सकता है? जान-बूझकर झूठी कसम खाने और अदालत में फर्जी हलफनामा पेश कर तथ्य छिपाने के इस गंभीर अपराध (Perjury) के लिए अब पिंगल बघेल के खिलाफ न्यायालय में धारा 340 के तहत कठोर फौजदारी मुकदमा दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बच्चों के नाम पर रचा था षड्यंत्र और एडीजे कोर्ट के जमकर लताड़ा..

पिंगल बघेल ने मीडिया में बड़े गर्व के साथ यह झूठा दावा किया था कि वह अपने दोनों नाबालिग बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और संपूर्ण भरण-पोषण का खर्च अकेले उठा रहा है। लेकिन अदालत के रिकॉर्ड ने उसके इस पाखंड की भी कलई खोल दी। धरमजयगढ़ के माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (ADJ Court) ने 23 सितंबर 2026 को अपने 10 पन्नों के ऐतिहासिक मूल आदेश में यह आधिकारिक न्यायिक निष्कर्ष दर्ज किया है कि पिंगल अपने ही बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर रहा है। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि पिंगल के अपने अधिवक्ता ने स्वयं अदालत के समक्ष स्वीकार किया है।

अपने ही खून और मासूम बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाले इस व्यक्ति ने समाज के सामने खुद को एक आदर्श पिता के रूप में पेश करने का जो घिनौना नाटक रचा था, अदालत की तीखी टिप्पणियों ने उस नकाब को पूरी तरह नोच फेंका है। जो पिता अपने बच्चों के स्कूल की फीस तक भरने से कतराता हो, उसका मीडिया में बैठकर पीड़िता का स्वांग रचना उसकी ओछी मानसिकता को जगजाहिर करता है।

चारदीवारी में अय्याशी, मर्यादाहीन आचरण और महिला स्टाफ के दैहिक उत्पीड़न का आरोप

पीड़िता ने मिडिया कर्मियों को प्रमाण देते हुए बताया कि पिंगल बघेल का असल चरित्र किसी भी सभ्य समाज के लिए एक बदनुमा दाग है। खुद को मीडिया में एक लाचार और शोषित पति के रूप में प्रस्तुत करने वाले इस व्यक्ति की हकीकत यह है कि वह अत्यंत चरित्रहीन आचरण में डूबा हुआ है। उसके न केवल दूसरी शादीशुदा महिला रनिभा शांडिल्य के साथ अवैध और मर्यादाहीन संबंध रहे हैं, बल्कि उसने अपने ही कार्यालय की स्टाफ कुमारी आरती निर्मलकर को भी शारीरिक संबंध बनाने के लिए लगातार विवश किया और उसे प्रताड़ित करने का घिनौना व गंभीर आपराधिक कृत्य किया।

जब घर के भीतर सीमा बघेल ने उसके इस घोर चरित्रहीन आचरण और अनैतिक गतिविधियों का कड़ा विरोध किया, तो अपनी इस गंदगी पर पर्दा डालने के लिए पिंगल ने सीमा के साथ हैवानियत भरी मारपीट की। उसने घर में हिंसक तांडव मचाया और जब बात बाहर निकलने लगी, तो उलटे अपने बचाव के लिए मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर सीमा बघेल और उनके पूरे परिवार पर झूठे और घटिया लांछन लगाने शुरू कर दिए, जो अब अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुके हैं।

₹45 लाख की पहचान चोरी, जाली दस्तखत और 8 दिन के भीतर खुली पोल..

वित्तीय मामलों में भी पिंगल बघेल का रिकॉर्ड आपराधिक जालसाजी से भरा हुआ है। सीमा बघेल को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद करने की नीयत से उसने उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग किया। उसने फर्जी और जाली हस्ताक्षरों के सहारे यानी पहचान की चोरी का सहारा लेकर बैंक से ₹45,00,000/- (पैंतालीस लाख रुपये) का बड़ा लोन फ्रॉड कर डाला।

यह कोई हवा-हवाई आरोप नहीं, बल्कि शासकीय दस्तावेजों में दर्ज एक अकाट्य सच्चाई है। जब इस गंभीर वित्तीय अपराध की पुलिस में शिकायत दर्ज हुई, तो पिंगल बघेल के होश उड़ गए। उसने स्वयं न्यायालय में यह औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि पुलिस शिकायत दर्ज होने के महज 8 दिनों के भीतर उसने बैंक का पूरा ₹45 लाख रुपये का लोन गुपचुप तरीके से चुकता कर दिया। सवाल यह उठता है कि जिस इंसान के पास बच्चों की स्कूल फीस देने के पैसे नहीं थे और जो खुद को ₹22 हजार महीने कमाने वाला लाचार बता रहा था, उसके पास अचानक 8 दिनों के भीतर ₹45 लाख रुपये की नकदी कहां से आ गई? यह घटना सीधे तौर पर उसकी अघोषित अकूत काली संपत्ति, अवैध कमाई और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का चीख-चीखकर प्रमाण दे रही है।

घरघोड़ा थाने की कार्यवाही पर सवाल, आरोपी को संरक्षण और निर्दोषों को जेल भेजने का आरोप.

पीड़िता के बताए अनुसार इस पूरे मामले का सबसे स्याह और शर्मनाक पहलू रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाने में पदस्थ कुछ पुलिस कर्मियों से जुड़ा है।

इन पुलिस कर्मियों ने पिंगल बघेल से मोटी रिश्वत की रकम डकार कर न्याय और कानून का खुला गला घोंटा। इन वर्दीधारियों ने पिंगल बघेल द्वारा किए गए ₹45 लाख के प्रमाणित लोन फ्रॉड, जाली हस्ताक्षर और पहचान की चोरी जैसे गैर-जमानती व संगीन अपराधों पर पूरी तरह पर्दा डाल दिया। इसके विपरीत, पिंगल की अघोषित काली कमाई को बचाने और उसे संरक्षण देने के लिए, इन पुलिसकर्मियों ने पिंगल की मनगढ़ंत कहानी पर सीमा बघेल के खिलाफ ₹22,63,428/- की काल्पनिक चोरी के झूठे आरोप को महज 7 दिनों के भीतर बिना किसी ठोस साक्ष्य के सही मान लिया।

कानून और विधिक प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाते हुए, बिना किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के, दुर्भावनापूर्ण तरीके से सीमा बघेल और उनके निर्दोष भाई को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। यह न केवल पुलिस कस्टडी का घोर दुरुपयोग था, बल्कि वर्दी की आड़ में खाकी द्वारा किया गया जघन्य अपराध था।

डीजीपी और गृह सचिव के समक्ष विधिक अभियोजन की अर्जी, नपेंगे रिश्वतखोर वर्दीधारी..

थाने के इन भ्रष्ट अधिकारियों ने केस डायरी में फर्जी और मनगढ़ंत बयान दर्ज किए, यहां तक कि 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के नाम पर भी झूठी और काल्पनिक गवाहियां तैयार कर दीं। इतने गंभीर वित्तीय घोटाले और पहचान की चोरी को इन पुलिसकर्मियों ने जान-बूझकर ‘पारिवारिक विवाद’ का हल्का तमगा देकर फाइल बंद करने का घिनौना कृत्य किया।

इस गंभीर शासकीय कदाचार और आपराधिक षड्यंत्र के खिलाफ सीमा बघेल ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP), रायपुर और गृह सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 218 (पुरानी धारा 197 CrPC) के तहत इन तीनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने हेतु विधिक अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) का औपचारिक आवेदन पत्र प्रेषित कर दिया है। सीमा बघेल का यह कड़ा संकल्प है कि वर्दी की आड़ में घूस खाकर एक निर्दोष महिला और एक सम्मानित सेवानिवृत्त प्राचार्य के परिवार को प्रताड़ित करने वाले इन भ्रष्ट पुलिस अफसरों को कानून के कटघरे में खड़ा कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।

पुलिस चार्जशीट दाखिल: पिंगल बघेल अब दस्तावेजों में आधिकारिक रूप से मुल्जिम..

पुलिस प्रशासन जो कल तक पिंगल बघेल के वित्तीय कदाचारों पर हीला-हवाली कर रहा था और मामले को दबाने में जुटा था, उसे सीमा बघेल के कड़े और अथक कानूनी संघर्ष के आगे आखिरकार झुकना ही पड़ा। पुलिस ने एफआईआर क्रमांक 138/2026 (भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं) के तहत बिना किसी अतिरिक्त बहानेबाजी के मूल क्रिमिनल चालान (आरोप-पत्र) माननीय सक्षम न्यायालय के समक्ष अंतिम रूप से पेश कर दिया है।

इस आरोप-पत्र के दाखिल होते ही पिंगल बघेल अब इस ₹45 लाख के लोन घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में आधिकारिक रूप से अभियुक्त बन चुका है। जो व्यक्ति कल तक समाज के सामने शरीफ बनने का ढोंग कर रहा था, आज वह कानूनी दस्तावेजों में एक चार्जशीटेड मुल्जिम के रूप में दर्ज हो चुका है।

दो अदालतों का कड़ा हंटर, ₹2.10 लाख की देनदारी और दुकानों-वाहनों की कुर्की से उल्टी गिनती शुरू..

पिंगल बघेल की वित्तीय हैसियत की असलियत परखते हुए दो अलग-अलग सक्षम न्यायालयों ने उसके फर्जी शपथ-पत्र को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने उसकी वास्तविक करोड़पति हैसियत और भारी-भरकम व्यावसायिक लेन-देन को आधार मानते हुए एडीजे कोर्ट से ₹30,000/- प्रति माह का अंतरिम भरण-पोषण तय किया। इसके साथ ही न्यायालय ने ₹2,10,000/- (दो लाख दस हजार रुपये) का बकाया एरियर 30 दिनों के भीतर एकमुश्त चुकाने का बेहद सख्त आदेश पारित किया है। इतना ही नहीं, न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (चन्द्रा साहब) की अदालत ने भी घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) की धारा 23 के तहत आवेदन पर संज्ञान लेते हुए पिंगल बघेल के विरुद्ध ₹10,000/- प्रति माह अतिरिक्त अदा करने का कड़ा आदेश पारित किया है।

लेकिन अदालत के इन कड़े आदेशों की अवहेलना करना पिंगल बघेल की फितरत बन चुका है। उसने हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच इस मासिक भरण-पोषण की राशि को बैंक खाते में जमा न करके सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना की है। इस खुली नाफरमानी के खिलाफ अब विधिक शिकंजा कस चुका है। 28 अक्टूबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पिंगल बघेल के दोनों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों—’प्रकाश फैब्रिकेशन’ और ‘बघेल सेंट्रिंग’ —सहित उसके नाम दर्ज तमाम वाहनों को सीधे तौर पर जब्त व कुर्क कराने की सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

पीड़िता सीमा बघेल ने विनम्र शब्दों में कहा है कि उनका परिवार और उनके सेवानिवृत्त प्राचार्य पिता आजीवन सत्य, ईमानदारी और आत्मसम्मान के मार्ग पर चले हैं। पिंगल बघेल का असली चरित्र, उसका अदालत में झूठा शपथ-पत्र, उसकी ₹45 लाख की वित्तीय जालसाजी, महिला कर्मचारियों के प्रति उसका शोषक व चरित्रहीन रवैया और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के साथ उसकी नापाक सांठगांठ अब अदालती रिकॉर्ड्स और पुलिस चार्जशीट का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं। मीडिया और समाज को अब किसी धोखेबाज के घड़ियाली आंसुओं के बहकावे में आने के बजाय, कोर्ट रूम के इन प्रामाणिक विधिक दस्तावेजों के आधार पर सच को पहचानना चाहिए। साथ ही अपनी संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाने वाले न्यायप्रिय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह से भी उसकी अपेक्षा है कि एक पक्षीय पुलिस कार्यवाही के पीछे का सच जानते हुए उस जैसी अन्य पीड़िताओं के साथ निष्पक्ष न्यायिक कार्यवाही करें। ताकि उसके समान किसी अन्य निर्दोष पीड़िता की चरित्र हत्या न हो, बरहाल इस मामले में पुलिस का भी पक्ष जल्द आने को है।

क्या कहते है वरिष्ठ अधिवक्ता तथागत श्रीवास्तव_

पीड़िता सीमा बघेल और पीड़िता जानकी सिदार मामले की पैरवी कर रहे शहर के जाने_माने वरिष्ठ अधिवक्ता जिनकी सलाह से पीड़िताओं ने मीडिया के समक्ष आकर अपनी आप बीती बताई।

अधिवक्ता तथागत श्रीवास्तव कहते है कि पुलिस की कार्यवाही में अक्सर एक पक्ष ही सामने आ पाता है,वह जो पुलिस बताना चाहती है। जबकि घटना का दूसरा पक्ष समाज से छुप जाता है। जिसे अधिवक्ता या तो न्यायपालिका की कार्यवाही से या मीडिया कर्मी अपने समाचार पत्र और अन्य साधनों से समाज के सामने लाने का प्रयास करते हैं।

इस प्रकार की कोशिश से पुलिस की एक पक्षीय या दोषपूर्ण कार्यवाही से समाज के सामने अपना सम्मान और व्यक्ति रूप से अपना मनोबल खो चुके लोगों की हिम्मत बढ़ती है। कोई अधिवक्ता या पत्रकार पुलिस / प्रशासन का दुश्मन नहीं होता। वो प्रयास करता है कि कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही सही दिशा में चलती रहे। ताकि समाज के लोगों का भरोसा कानून व्यवस्था पर बना रहे।।

पीड़िता सीमा बघेल का मामला अपने आप में अनोखा है। जिसकी पूरी जानकारी पीड़िता ने आप सबके सामने रख दी है। फिलहाल मेरे प्रयास से माननीय न्यायालय ने पीड़िता को झूठे मामले न केवल बड़ी राहत दी है। बल्कि पीड़िता को 30000 Rs का अंतरिम भरण पोषण दिए जाने का आदेश दिया है।

वही एक अन्य पीड़िता जानकी सिदार प्रकरण में भी एक पूर्वाग्रहित पुलिस कर्मी के गलत आचरण के विरुद्ध में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और आयोग के समक्ष लिखित आवरण प्रस्तुत करने के साथ न्यायिक प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्दी ही इस मामले में भी उचित कानूनी कार्यवाही का सच आप सबके सामने आ जायेगा ।।

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