औपचारिकता बनकर रह गई शांति समिति की बैठक, 52 गांवों के क्षेत्र में गिनती के चेहरों के बीच मंथन

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कुड़ेकेला:-होली के पावन पर्व पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान के सख्त निर्देशों के बावजूद, छाल तहसील और थाना क्षेत्र में शांति समिति की बैठक महज एक खानापूर्ति साबित हुई। तहसीलदार और थाना प्रभारी के नेतृत्व में तहसील कार्यालय में आहूत इस बैठक में जन-भागीदारी का भारी अभाव देखा गया।

हैरानी की बात यह है कि छाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत 52 गांव आते हैं, लेकिन बैठक में इन गांवों के जागरूक नागरिकों प्रमुखजन प्रतिनिधियों और स्थानीय मीडिया को दूर रखा गया। मुट्ठी भर लोगों की उपस्थिति में हुई इस बैठक ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। जब क्षेत्र के जिम्मेदार लोग ही बैठक से नदारद रहे, तो कानून व्यवस्था और सुरक्षा के निर्देश आम जनता तक कैसे पहुंचेंगे,

हाल ही में जिला पुलिस कप्तान ने सख्त चेतावनी दी थी कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी और हुड़दंगियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक तरफ पुलिस मुख्यालय से शांति समितियों को सक्रिय करने के निर्देश हैं, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील गांवों की पहचान और रात्रि गश्त जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में ‘गोपनीयता’ जैसा माहौल बना रहा।

यदि जनप्रतिनिधि और मीडिया ही बैठक से दूर रहे, तो पुलिस की बात अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगी संवेदनशील गांवों के लिए बनाई गई योजना की जानकारी उन गांवों के प्रमुखों को क्यों नहीं दी गई,क्या शांति समिति की बैठक केवल कागजों पर कोरम पूरा करने के लिए की जा रही है।होली जैसे संवेदनशील त्यौहार पर जब पुलिस और प्रशासन को जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए, तब इस तरह की सीमित बैठकें सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक का कारण बन सकती हैं।

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