बोले- बिलासपुर शांत है, लेकिन कमजोर नहीं; शहर के हक के लिए जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे
रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
बिलासपुर। अभावों से भरे बचपन से लेकर उद्योग और समाजसेवा के क्षेत्र में पहचान बनाने तक का सफर तय करने वाले उद्योगपति एवं समाजसेवी प्रवीण झा ने बिलासपुर प्रेस क्लब के संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में अपने जीवन संघर्ष, उद्योग, पर्यावरण, शहर के विकास और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्ति को सफलता तक पहुंचा सकता है।
कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजित मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करिहार, कोषाध्यक्ष किशोर सिंह और सह-सचिव हरिकिशन गंगवानी सहित वरिष्ठ पत्रकारों ने शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर प्रवीण झा का स्वागत किया।
अभावों में बीता बचपन, मांगकर पढ़ीं किताबें
प्रवीण झा ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका बचपन बिहार के एक सुदूर गांव में अभावों के बीच बीता। उन्होंने बताया कि 10वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने पहली बार बिजली देखी थी। स्कूल जाने के लिए बरसात के दिनों में नदी-नालों को पार करना पड़ता था। पढ़ाई जारी रखने के लिए कई बार किताबें मांगकर पढ़नी पड़ीं।
₹1000 की पहली पगार और ₹4 रोज की किराए की साइकिल
वर्ष 1993 में छत्तीसगढ़ आने के बाद उन्होंने जिंदल स्टील्स में करीब ₹1000 मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की। बिलासपुर में आने-जाने के लिए उनके पास अपनी साइकिल तक नहीं थी। ऐसे में वे रेलवे स्टेशन से ₹4 प्रतिदिन किराए पर साइकिल लेकर शहर में आते-जाते थे।
उन्होंने बताया कि नौकरी के पहले ही दिन मन में यह तय कर लिया था कि जीवन भर नौकरी नहीं करनी है। उनका सपना ऐसा काम खड़ा करने का था, जिससे खुद के साथ-साथ सैकड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
उद्योग का मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं
उद्योग और पर्यावरण को लेकर प्रवीण झा ने कहा कि किसी भी उद्योग का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं होना चाहिए। जिस गांव की जमीन पर उद्योग स्थापित होता है, वहां के लोगों का स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण की सुरक्षा उद्योगपति की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों का विश्वास हासिल किए बिना कोई भी उद्योग लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता। उद्योगों को विकास के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।
बिलासपुर के विकास में एयरपोर्ट को बताया पहली जरूरत
बिलासपुर के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि शहर में बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए मजबूत हवाई कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। उन्होंने एयरपोर्ट विस्तार को शहर की प्राथमिक जरूरतों में शामिल बताया।
उन्होंने कहा, “बिलासपुर के लोग सीधे और शांतिप्रिय हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम कमजोर हैं। जरूरत पड़ी तो शहर के हक की लड़ाई के लिए हम सब सड़क पर उतरेंगे। सरकार किसी की भी हो, बिलासपुर अपना हक लेकर रहेगा।”
युवाओं से बोले- कोई काम छोटा नहीं
युवाओं को लेकर प्रवीण झा ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा नौकरी को ही सफलता का माध्यम मानते हैं। उन्होंने युवाओं से व्यवसाय और स्वरोजगार की संभावनाओं को भी समझने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। पान का ठेला लगाने वाला व्यक्ति भी व्यवसायी है और बड़ी फैक्ट्री चलाने वाला व्यक्ति भी व्यवसायी है। जरूरत है तो सिर्फ काम को सम्मान के साथ करने और आगे बढ़ने की सोच की।
राजनीति में आने से नहीं किया इनकार
राजनीति में प्रवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रवीण झा ने कहा कि फिलहाल उनकी राजनीति में आने की कोई विशेष रुचि नहीं है। हालांकि, यदि भविष्य में शहर के विकास और जनता के हित से जुड़े मुद्दे राजनीति के माध्यम से आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी, तो वे राजनीति में आने से परहेज नहीं करेंगे।
‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ प्रोजेक्ट पर भी दी जानकारी
शहर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के संबंध में उन्होंने बताया कि आधुनिक CCTV कैमरों से संबंधित प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है। उनके अनुसार अगले महीने इसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है।
धर्म को जीवन के आचरण से जोड़ने पर जोर
संस्कृति और धर्म को लेकर उन्होंने कहा कि धर्म केवल त्योहारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे वर्ष के 365 दिन जीवन के आचरण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने रामलला दर्शन यात्रा को आगे भी जारी रखने की बात कही।
बोले- काम करने वालों की ही चर्चा होती है
कार्यक्रम के अंत में आलोचनाओं से जुड़े सवाल पर प्रवीण झा ने कहा कि जो व्यक्ति काम करता है, उसी की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को आलोचनाओं से विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए और समाज के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए। समय के साथ अच्छे काम की पहचान होती है और आलोचक भी उस काम को स्वीकार करने के लिए मजबूर होते हैं।
