खरसिया हत्याकांड में थाना प्रभारी नंद किशोर गौतम की दमदार विवेचना का असर, दो दोषियों को उम्रकैद

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मकान-जमीन विवाद में खूनी वारदात, पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से दोनों आरोपी दोषी करार

रायगढ़/खरसिया। खरसिया के बहुचर्चित वृद्ध हत्याकांड में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। 62 वर्षीय गेंदलाल डनसेना की निर्मम हत्या के मामले में उनके सगे नाती ओमप्रकाश डनसेना उर्फ गोलू और कार्तिक डनसेना को दोषी ठहराया गया है। दोनों ने मकान और जमीन से जुड़े पारिवारिक विवाद के बीच वृद्ध पर जानलेवा हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।

गैस सिलेंडर से तोड़ा दरवाजा, टंगिया-फावड़े से किया हमला

मामला दिसंबर 2022 का है। ग्राम सोण्डका निवासी गेंदलाल डनसेना का पुश्तैनी मकान और जमीन को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण और संपत्ति में अधिकार को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया।

25 दिसंबर को आरोपियों ने मृतक के छोटे भाई के घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ की। इसके अगले दिन 26 दिसंबर को पारिवारिक बैठक के दौरान विवाद फिर भड़क गया। दोनों आरोपी अपने वृद्ध नाना को मारने दौड़े। जान बचाने के लिए गेंदलाल कमरे में छिप गए, लेकिन आरोपियों ने गैस सिलेंडर से दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया और टंगिया, फावड़ा व डंडे से हमला कर उनकी हत्या कर दी।

एक आरोपी मौके से गिरफ्तार, दूसरा अगले दिन पकड़ा गया

घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी खरसिया उप निरीक्षक नंद किशोर गौतम टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एक आरोपी कार्तिक डनसेना को घटनास्थल से ही हिरासत में लिया गया, जबकि फरार आरोपी ओमप्रकाश डनसेना को अगले दिन मुखबिर की सूचना पर नावापारा रोड से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त टंगिया, फावड़ा, डंडा, गैस सिलेंडर और घटना के समय पहने गए कपड़े जब्त किए। विवेचना के दौरान महत्वपूर्ण भौतिक और मौखिक साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में मजबूत चालान पेश किया गया।

मजबूत विवेचना बनी सजा का आधार

1 अगस्त 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश खरसिया श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव की अदालत ने सत्र प्रकरण क्रमांक 01/2026 में फैसला सुनाया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34, 427 एवं 449 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया।

पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी खरसिया नंद किशोर गौतम द्वारा की गई थी। वहीं एसएसपी शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में मामले के साक्ष्यों की पेशी सुनिश्चित कराई गई और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को कठोर सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

एसएसपी शशि मोहन सिंह का सख्त संदेश

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि गंभीर अपराधों में दोषियों को कठोर दंड दिलाना रायगढ़ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वैज्ञानिक विवेचना, ठोस साक्ष्य संकलन और अभियोजन के प्रभावी समन्वय से हत्या जैसे जघन्य मामलों में दोषियों को सजा दिलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अपराध करने वालों को कानून के कठघरे तक पहुंचाकर हर हाल में कठोर दंड दिलाया जाएगा।

रायगढ़ पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से आया यह फैसला गंभीर अपराधों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई का एक और उदाहरण माना जा रहा है।

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