रायगढ़ में रक्षक ही बने भक्षक, महापौर और पार्षद पर लगा सामुदायिक भवन की शासकीय भूमि पर कब्जे का गंभीर आरोप..
रायगढ़@दैनिक खबर सार :– एक तरफ प्रशासन ‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से जनता तक सुशासन पहुंचाने और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी शिविर में शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर और स्थानीय पार्षद पर भ्रष्टाचार व पद के दुरुपयोग का एक बेहद संगीन और चौंकाने वाला आरोप लगा है।

जनसमस्या निवारण शिविर में एक लिखित शिकायत ने पूरे नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान और वार्ड पार्षद धनेश्वरी दुतिया पर मिलीभगत कर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने और वहां निजी निर्माण कराने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला इस बात का जीवंत उदाहरण प्रतीत होता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता न्याय की गुहार लगाने आखिर कहां जाए।
पूरा मामला रायगढ़ नगर निगम के वार्ड क्रमांक 37 का है। ‘सुशासन तिहार 2026’ के तहत आयोजित शिविर में वार्ड 37 निवासी मुरारीलाल नामक एक जागरूक नागरिक ने अतिक्रमण विभाग को एक लिखित शिकायत सौंपी है। प्राप्त आवेदन के अनुसार, वार्ड क्रमांक 37 के अंतर्गत आने वाले नयापारा, भाटनडिपा क्षेत्र में एक सामुदायिक भवन के लिए सरकारी भूमि आरक्षित है। यह सामुदायिक भवन क्षेत्र के आम नागरिकों के सार्वजनिक उपयोग के लिए है।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बेशकीमती शासकीय भूमि पर स्वयं महापौर जीवर्धन चौहान और स्थानीय पार्षद धनेश्वरी दुतिया द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है। बात सिर्फ अतिक्रमण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आवेदन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि इस सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बाकायदा एक ‘निजी मकान’ का निर्माण कराया जा रहा है।
इस घटना ने सत्ता और प्रशासन के गठजोड़ पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता मुरारीलाल ने अपने आवेदन में तीखे शब्दों में कहा है कि जन-प्रतिनिधि अपने उच्च पद और सरकार के रसूख का पूरी तरह से गलत उपयोग कर रहे हैं। जिस महापौर और पार्षद को शहर के विकास, शासकीय संपत्तियों की रक्षा और जनता के हितों की रखवाली के लिए चुना गया था, यदि वही लोग खुलेआम सार्वजनिक उपयोग की भूमि को हड़पने लगें, तो व्यवस्था पर से आम आदमी का विश्वास उठना तय है।
सामुदायिक भवन जैसी जगह, जो कि मोहल्ले के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के सुख-दुख और सामाजिक आयोजनों का केंद्र होती है, उसे अपने निजी स्वार्थ और लालच की भेंट चढ़ाना एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है।
इस सनसनीखेज शिकायत के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और नगर निगम के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर अग्निपरीक्षा से गुजर रही है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर तत्काल कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या ‘सुशासन तिहार’ का मंच केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहता है, या फिर प्रशासन सत्ता के दबाव से मुक्त होकर अपने ही शहर के महापौर जीवर्धन चौहान और पार्षद धनेश्वरी दुतिया के खिलाफ निष्पक्ष जांच का साहस दिखा पाता है। शहर की जनता की निगाहें अब कलेक्टर और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इस रसूखदार अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर चलेगा या फिर इस गंभीर शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।




