भाजपा बताए किस बात का आपातकाल मना रही? वर्तमान मुद्दों पर जवाब दे सरकार: वसीम खान

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रायगढ़। जिला कांग्रेस महामंत्री Wasim Khan ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे आपातकाल दिवस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से मौजूदा मुद्दों पर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली भाजपा को पहले पिछले एक दशक का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। उनके अनुसार वर्ष 2014 के बाद देश जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह आम लोगों के लिए किसी अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति का एहसास कराती हैं।

वसीम खान ने कहा कि आज देश का युवा, किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, महिलाएं, आदिवासी, गरीब और मध्यम वर्ग गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भाजपा अतीत की राजनीति में व्यस्त है, जबकि जनता वर्तमान समस्याओं का समाधान चाहती है।

युवाओं के भविष्य पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि लाखों शिक्षित युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक, भर्ती घोटालों और नियुक्तियों में देरी ने उनके सपनों को तोड़ दिया है। कई परीक्षाएं रद्द हुईं और युवाओं के बहुमूल्य वर्ष बर्बाद हो गए। रोजगार देने के बजाय सरकार केवल आश्वासन देती रही।

बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार घिरी

कांग्रेस नेता ने कहा कि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी विभागों में लाखों पद खाली हैं, लेकिन नियमित भर्ती नहीं हो रही। संविदा और आउटसोर्सिंग के कारण स्थायी रोजगार के अवसर घटे हैं।

उन्होंने कहा कि महंगाई ने आम नागरिक का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल, दाल, दूध, सब्जियां और दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

किसानों और व्यापारियों की परेशानी

वसीम खान ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ। बढ़ती लागत, महंगे खाद-बीज, बिजली और सिंचाई खर्च ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी का असर छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों पर भी बताया। उनके अनुसार इन फैसलों से हजारों छोटे उद्योग प्रभावित हुए और लाखों लोगों के रोजगार पर असर पड़ा।

जल, जंगल और जमीन पर चिंता

उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर कई क्षेत्रों में जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और आदिवासी समुदायों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। जल, जंगल और जमीन को उन्होंने आदिवासी समाज की अस्मिता और जीवन का आधार बताया।

वसीम खान ने कहा कि यदि प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों के अधिकार कमजोर होंगे, तो यह सामाजिक न्याय और पर्यावरण—दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

शिक्षा और स्वास्थ्य भी बने चुनौती

उन्होंने कहा कि निजी शिक्षा और निजी अस्पतालों का बढ़ता खर्च गरीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों के लिए लगातार कठिन हो रही हैं।

भाजपा से पूछे 12 बड़े सवाल

वसीम खान ने भाजपा से सवाल किया कि—

  • युवाओं को रोजगार कब मिलेगा?
  • पेपर लीक कब रुकेगा?
  • रिक्त सरकारी पद कब भरेंगे?
  • महंगाई से राहत कब मिलेगी?
  • पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम कब घटेंगे?
  • किसानों की आय कब बढ़ेगी?
  • छोटे व्यापारियों को राहत कब मिलेगी?
  • आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा कब होगी?
  • जंगलों की कटाई कब रुकेगी?
  • शिक्षा और स्वास्थ्य आमजन की पहुंच में कब आएंगे?
  • निजीकरण पर सरकार की स्पष्ट नीति क्या है?
  • गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत कब मिलेगी?

अंत में वसीम खान ने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि अब जनता इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान का हिसाब मांग रही है।

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