द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती एकता अग्रवाल ने सुनाया फैसला
पेंड्रा । अपनी ड्यूटी कर रहे पेंड्रा थाना के पुलिस प्रधान आरक्षक पर जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) एकता अग्रवाल की अदालत ने प्रधान आरक्षक पर हमला करने वाले आरोपी चंद्रभवन सिंह को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महज 8 महीने के भीतर ये फैसला आया है।
घटना पिछले साल 24 जुलाई 2025 की है। पेंड्रा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक हितेश कुमार एक मामले की जांच के सिलसिले में आरोपी के घर पहुंचे थे। जांच के दौरान जब पुलिसकर्मी आरोपी की मां को समझा रहे थे, तभी इसी बात पर आरोपी चंद्रभवन सिंह उत्तेजित हो गया। आरोपी ने घर में रखे धारदार हथियार (टांगिया) से प्रधान आरक्षक पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया।
इस हमले में प्रधान आरक्षक हितेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए आरोपी को दूसरे दिन ही किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश एकता अग्रवाल ने शासकीय सेवक पर हमले और जानलेवा वार करने के अपराध को गंभीर माना। अदालत ने आरोपी चंद्रभवन सिंह को भारतीय न्याय संहिता की धारा109(1) के तहत दोषी पाते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1000 के अर्थदंड से दंडित किया।
वही धारा 121(2) के तहत 5 साल का सश्रम कारावास और ₹1000 अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेगी। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने की और उन्होंने बताया कि अपराध दिनांक से महज 8 महीने के भीतर ही यह फैसला माननीय अदालत द्वारा आया है जो की त्वरित न्याय की दिशा में सराहनीय है

