सुंदरगढ़ के ‘स्नेक मैन’ खगेसर सोरानिया: दो दशक से सांपों का रेस्क्यू कर बचा रहे इंसान और वन्यजीव

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कई बार जहरीले सांपों के डसने का दावा, कोबरा के तीन बार काटने की भी चर्चा; बस्तियों में सांप निकलते ही पहुंच जाते हैं खगेसर

सुंदरगढ़। सांप का नाम सुनते ही जहां अधिकांश लोग डर के मारे पीछे हट जाते हैं, वहीं सुंदरगढ़ जिले के रायबोगा थाना क्षेत्र निवासी खगेसर सोरानिया पिछले करीब दो दशक से सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी है, जो सांपों को देखकर घबराने के बजाय उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू करने में जुट जाते हैं।

20-22 वर्षों से जारी है सांपों का रेस्क्यू

खगेसर सोरानिया के बारे में बताया जाता है कि वह करीब 20 से 22 वर्षों से सांप पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग प्रजातियों के सांपों को रेस्क्यू किया है। जब भी किसी घर, बस्ती या आबादी वाले इलाके में सांप दिखाई देता है, स्थानीय लोग उनकी मदद लेते हैं।

सूचना मिलते ही खगेसर मौके पर पहुंचते हैं और सावधानीपूर्वक सांप को पकड़कर उसे इंसानी आबादी से दूर जंगल या उपयुक्त प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ने का प्रयास करते हैं।

कोबरा के तीन बार डसने की भी चर्चा

खगेसर के बारे में क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चा उनके साथ हुए कथित सर्पदंश की घटनाओं को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रेस्क्यू के दौरान उन्हें कई बार जहरीले सांपों ने डसा है। यहां तक कि कोबरा द्वारा तीन बार डसे जाने की बात भी सामने आती है।

हालांकि, इन घटनाओं के बावजूद उनके सुरक्षित रहने को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे असाधारण क्षमता या दैवीय कृपा से जोड़कर देखते हैं। वहीं, चिकित्सकीय और वैज्ञानिक दृष्टि से किसी व्यक्ति के शरीर पर सांप के जहर के असर को लेकर बिना प्रमाण निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

शोहरत नहीं, वन्यजीव संरक्षण बना उद्देश्य

खगेसर का काम केवल सांप पकड़ने तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य सांपों को मारे जाने से बचाना और उन्हें उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाना है। आबादी वाले क्षेत्रों में सांप निकलने पर अक्सर लोग डर के कारण उसे मारने की कोशिश करते हैं। ऐसे समय में खगेसर उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रयास करते हैं।

इससे एक ओर लोगों को संभावित खतरे से राहत मिलती है, वहीं दूसरी ओर सांप जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव की भी जान बचती है।

ग्रामीणों के लिए बन चुके हैं भरोसे का नाम

पिछले दो दशकों से लगातार किए जा रहे इस कार्य के कारण आसपास के इलाकों में खगेसर सोरानिया की पहचान एक भरोसेमंद स्नेक रेस्क्यूअर के तौर पर बनी है। सांप निकलने की सूचना मिलने पर लोग उनसे संपर्क करते हैं और वे अपनी क्षमता के अनुसार मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाते हैं।

खगेसर की कहानी यह भी बताती है कि वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और मानवीय संवेदना के साथ काम किया जाए तो इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जहरीले सांपों से दूरी और विशेषज्ञों की सलाह जरूरी

हालांकि खगेसर के अनुभव अपने आप में चर्चा का विषय हैं, लेकिन आम लोगों के लिए जहरीले सांपों को पकड़ने या उनके करीब जाने का प्रयास बेहद खतरनाक हो सकता है। सर्पदंश की स्थिति में किसी घरेलू उपाय या कथित प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग की मदद लेना ही सुरक्षित तरीका है।

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