Sundargarh Teacher Promotion Vivad : सुंदरगढ़(Sundargarh News) जिले में प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में भारी असंतोष और आक्रोश देखने को मिल रहा है। जिला शिक्षा विभाग की कथित उदासीनता और लापरवाही के कारण पदोन्नति प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिससे शिक्षक वर्ग खुद को आहत महसूस कर रहा है।
पदोन्नति में अनावश्यक विलंब का आरोप
Sundargarh Teacher Promotion Vivad : शिक्षकों का आरोप है कि सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद जिले में लेवल-3, लेवल-4 और लेवल-5(B) में पदोन्नति देने में भारी हीला-हवाली की जा रही है। जहां लेवल-3 की प्रक्रिया पर स्टे लगा हुआ है, वहीं लेवल-5(B), लेवल-4 और लेवल-5(A) से लेवल-5(B) में प्रमोशन का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है।
ग्रेजुएशन सूची में गड़बड़ी के आरोप
Sundargarh Teacher Promotion Vivad : 28 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 12033 के तहत लेवल-5(B) से लेवल-4 की जो वरीयता (ग्रेजुएशन) सूची जारी की गई, उसमें गंभीर विसंगतियां होने का आरोप है। शिक्षकों का कहना है कि इस सूची में कई वरिष्ठ शिक्षकों को नीचे और कनिष्ठ शिक्षकों को ऊपर रख दिया गया है, जिससे 1997 के नियम-15 और नियम-11 के तहत तय ‘इंटर-से सीनियरिटी’ का पालन न होने की बात सामने आ रही है। इससे शिक्षकों में गहरी निराशा है।
बिना अंतिम सूची के CCR मांगे जाने पर सवाल
Sundargarh Teacher Promotion Vivad : जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 30 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 12193 जारी कर लेवल-5(A) और लेवल-5(B) के शिक्षकों से CCR (कॉन्फिडेंशियल केस रिपोर्ट) मांगी है, जबकि लेवल-5(A) की अंतिम वरीयता सूची अब तक जारी ही नहीं हुई है, जिस पर शिक्षक हैरानी जता रहे हैं।
CCR जमा करने में शिक्षकों को हो रही परेशानी
Sundargarh Teacher Promotion Vivad : अंतिम सूची के अभाव में शिक्षकों को CCR जमा करने के लिए स्कूलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आरोप है कि कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापक CCR पर हस्ताक्षर करने से कतरा रहे हैं, वहीं BEO और ABEO कार्यालयों में मनमानी और कुछ ब्लॉकों में अवैध लेन-देन की चर्चाएं भी चल रही हैं।
अधिकारियों की मनमानी और तबादले की उठी मांग
Sundargarh Teacher Promotion Vivad : शिक्षकों का आरोप है कि बकाया वेतन या अन्य कार्यों के लिए कार्यालय जाने पर संबंधित बाबू मनमाने ढंग से पेश आते हैं और उनकी बात सुनने से इनकार करते हैं। सालों से एक ही जगह जमे इन अधिकारियों के तबादले की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।
अब देखना यह होगा कि जिला शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कब तक होता है।


