विकास जैन मित्तल के नेतृत्व में छात्रों ने उठाए राज्य कोटा, निवास प्रमाण-पत्र और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर छात्रों की नाराजगी सामने आई है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के जन्मदिन के अवसर पर छात्रों ने काउंसलिंग में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
राज्य कोटे में सीट आवंटन को लेकर उठे सवाल
छात्रों का कहना है कि राज्य कोटे के तहत सीट आवंटन में कुछ अभ्यर्थियों की पात्रता और निवास संबंधी दस्तावेजों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने मांग की कि राज्य कोटे के लिए निर्धारित पात्रता की दोबारा जांच की जाए और सभी संबंधित दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए।
धरना देने पहुंचे छात्रों को पुलिस ने रोका
विकास जैन मित्तल के नेतृत्व में छात्र शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल पर पहुंचे थे। छात्रों के अनुसार, पुलिस ने उन्हें वहां प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद छात्रों ने अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, रायपुर के नाम ज्ञापन सौंपा।
छात्रों ने रखीं प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने NEET UG 2026 छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया की समीक्षा और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। इसके साथ ही राज्य कोटे के तहत सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के निवास, पात्रता और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का पुनः सत्यापन कराने की मांग भी रखी गई।
छात्रों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने तथा जांच में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
तीन दिन में कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन को तीन दिन का समय दिया है। विकास जैन मित्तल ने कहा कि मामला विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए केवल आश्वासन के बजाय जांच और कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया सामने आनी चाहिए।
छात्रों ने कहा कि निर्धारित समयावधि में उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
NEET UG 2026 काउंसलिंग को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब छात्रों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


