कोटमी कला बाजार की जमीन पर में दबंगों का कब्जा, साप्ताहिक बाजार के अस्तित्व पर संकट

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कलेक्टर से फोरेंसिक जांच और कूट रचना कर जमीन हड़पने वालों पर एफ आई आर की मांग

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 12 जून 2026 गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के सकोला तहसील स्थित कोटमी कला गांव में मंगलवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार में अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। इस साप्ताहिक बाजार की बेस कीमती जमीन को दबंगों द्वारा हड़पने के लिए कूट रचना करके जमीन अपने नाम में कर ली गई है। यह वही बाजार है जहां 15 दिन पूर्व एक सर्राफा व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर लूट की गई थी। उसे बहुचर्चित हत्याकांड के बाद अब बाजार की जमीन हड़पने का मामला सामने आया है जिससे एक बार फिर कोटमी सुर्खियों में है। मामले की शिकायत कलेक्टर को ग्रामीणों ने की है।

आजादी के पहले से हर मंगलवार लगने वाले प्रसिद्ध साप्ताहिक बाजार की शासकीय भूमि समेत 5 खसरा नंबरों पर दबंगो द्वारा कब्जे का आरोप लगा है। राजस्व रिकॉर्ड में कूटरचना कर सरकारी और निजी जमीन हड़पने की शिकायत लेकर दर्जनों ग्रामीण गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार, गांव के मुख्तार अहमद अंसारी और उसके परिवार ने पटवारी व राजस्व निरीक्षक से सांठगांठ कर खसरा, नक्शा और मिसल में हेरफेर किया है। आरोप है कि बाजार की शासकीय भूमि को निजी जमीन बताया गया और आसपास के परिवारों की खरीदी जमीन को नक्शे से विलोपित कर दिया गया। विवादित खसरों में खसरा नंबर 110/9, 110/10, 110/8 शामिल हैं जिन्हें खरीदी जमीन बताकर नक्शे से हटाने का आरोप है। वहीं खसरा नंबर 111/1 यूनाइटेड क्रिश्चियन सोसायटी की जमीन है जिस पर कब्जे का प्रयास किया गया। खसरा नंबर 111/11की आड़ में भी सोसायटी की जमीन को अपनी बताकर कब्जाने का आरोप लगा है।

कोटमी कला का साप्ताहिक बाजार आसपास के 20 से ज्यादा गांवों की लाइफलाइन है। अगर बाजार उजड़ता है तो सैकड़ों छोटे दुकानदार, सब्जी-फल बेचने वाले किसान और दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि बाजार से ही कई परिवारों का घर चलता है।

इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने कलेक्टर के सामने तीन सूत्रीय मांग रखी है। ग्रामीणों की पहली मांग है कि विवादित सभी खसरा नंबरों के दस्तावेजों की उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच कराई जाए ताकि कूटरचना का खुलासा हो सके। _शिकायत में ग्रामीणों नेदूसरी मांग की है कि कूटरचना में शामिल पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों पर तत्काल एफ आई आर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए।ग्रामीणों की तीसरी मांग है कि जांच पूरी होने तक विवादित जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण और कब्जे पर पूरी तरह रोक लगाई जाए तथा शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे।

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