एक ही दिन दिखेंगी कई खगोलीय घटनाएं, छह ग्रहों की कतार और पर्सिड उल्का वर्षा भी बनेगी आकर्षण
नई दिल्ली। बुधवार, 12 अगस्त 2026 का दिन खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस दिन साल का पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इसके साथ ही सुबह आसमान में छह ग्रह एक कतार में नजर आएंगे और रात में पर्सिड उल्का वर्षा अपने चरम पर होगी। अमावस्या के कारण आसमान में चांदनी नहीं होने से उल्का वर्षा को देखने के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी।
कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
12 अगस्त को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड तथा स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इन क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा। विशेष रूप से स्पेन के उत्तरी हिस्सों में ग्रहण के दौरान दिन में कुछ समय के लिए अंधेरा छाने जैसा दृश्य देखने को मिल सकता है।
इन देशों में दिखाई देगा आंशिक ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण के अलावा अमेरिका के उत्तरी हिस्सों, कनाडा, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। कुछ स्थानों पर चंद्रमा सूर्य के 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्से को ढक सकता है।
अफ्रीका और मुख्यभूमि यूरोप के कुछ हिस्सों में सूर्यास्त के समय भी आंशिक ग्रहण का नजारा देखने को मिल सकता है।
भारत में दिखाई देगा या नहीं?
भारत में 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। ग्रहण की प्रमुख अवस्थाएं भारतीय समय के अनुसार रात में होंगी, जबकि भारत में उस समय सूर्य अस्त हो चुका होगा।
भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत करीब रात 9:05 बजे होगी। पूर्ण ग्रहण लगभग रात 10:29 बजे शुरू होगा और करीब 11:17 बजे अपने मध्य चरण में रहेगा। पूर्ण ग्रहण लगभग रात 12:05 बजे समाप्त होगा। ग्रहण की अंतिम अवस्था 13 अगस्त की रात करीब 1:29 बजे समाप्त होगी।
क्यों लगता है सूर्य ग्रहण?
जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो वह सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
12 अगस्त को छह ग्रहों की कतार
सूर्य ग्रहण के अलावा 12 अगस्त की सुबह एक और खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। सूर्योदय से लगभग 45 से 75 मिनट पहले छह ग्रह—बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून—आसमान में एक कतार में दिखाई देंगे।
इनमें मंगल, बृहस्पति और शनि को अपेक्षाकृत आसानी से पहचाना जा सकेगा, जबकि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए उपकरण की आवश्यकता पड़ सकती है।
रात में चरम पर होगी पर्सिड उल्का वर्षा
12 अगस्त की रात पर्सिड उल्का वर्षा भी अपने चरम पर होगी। अमावस्या के कारण आसमान में चांदनी का प्रभाव कम रहेगा, जिससे अंधेरे स्थानों पर उल्काओं को देखने की परिस्थितियां बेहतर होंगी।
इस तरह 12 अगस्त 2026 खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद खास दिन होगा, हालांकि भारत में सूर्य ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य देखने को नहीं मिलेगा।




