शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होगा शक्ति आराधना का पर्व, 10 दिनों तक होगी मां दुर्गा की उपासना

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इस बार नवरात्रि में तिथि वृद्धि, 17 और 18 अक्टूबर को होगी मां कालरात्रि की पूजा

बिलासपुर। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। वर्ष 2026 में यह पर्व विशेष संयोग के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि की अवधि सामान्य नौ दिनों के बजाय 10 दिनों की रहेगी। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे और घरों तथा मंदिरों में घटस्थापना, अखंड ज्योत एवं विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाएंगे।

11 अक्टूबर से मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 को मां शैलपुत्री की आराधना के साथ होगी। इसके बाद क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी।

इस बार तिथि वृद्धि के कारण 17 और 18 अक्टूबर को मां कालरात्रि की उपासना होगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को मां महागौरी और 20 अक्टूबर को मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि का समापन होगा।

नवरात्रि में मां के नौ स्वरूपों की आराधना

नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। मां शैलपुत्री को दृढ़ता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी तप एवं संयम, मां चंद्रघंटा शांति और साहस, जबकि मां कूष्मांडा ऊर्जा एवं सृजन शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।

मां स्कंदमाता को मातृत्व और वात्सल्य, मां कात्यायनी को शक्ति एवं साहस, मां कालरात्रि को नकारात्मकता के नाश, मां महागौरी को पवित्रता और मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की देवी के रूप में पूजा जाता है।

गज पर मां के आगमन की धार्मिक मान्यता

नवरात्रि में देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इस वर्ष नवरात्रि का शुभारंभ रविवार से होने के कारण परंपरागत मान्यता के अनुसार मां दुर्गा के गज यानी हाथी पर आगमन की बात कही जा रही है।

धार्मिक मान्यताओं में हाथी को शांति, शक्ति, समृद्धि और वर्षा से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण देवी के गज पर आगमन को सुख-समृद्धि और खुशहाली का शुभ संकेत माना जाता है। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, इसका वैज्ञानिक रूप से भविष्यवाणी के तौर पर कोई प्रमाण नहीं है।

महिषासुर वध से जुड़ी है नवरात्रि की प्रमुख कथा

शारदीय नवरात्रि की पौराणिक कथा देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से जुड़ी है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार महिषासुर के अत्याचारों से देवता और मानव परेशान हो गए थे। तब देवताओं की शक्तियों से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ।

मान्यता है कि देवी दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर धर्म की स्थापना की। इसी विजय की स्मृति में नवरात्रि के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।

पूजा के साथ बुराइयों पर विजय का संदेश

नवरात्रि को केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव का अवसर भी माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु उपवास, पूजा-पाठ और ध्यान के माध्यम से आत्मसंयम का प्रयास करते हैं।

नवरात्रि का संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, आलस्य और नकारात्मक विचारों पर विजय प्राप्त करे। 2026 की शारदीय नवरात्रि भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और शक्ति साधना का विशेष अवसर लेकर आ रही है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

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